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दुनियाभर में आज मनाया जा रहा ईद का जश्न, जानिए इससे जुड़ी 5 खास बातें

Sat, 16 Jun 2018 11:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनियाभर में आज खुशियों का त्योहार ईद-उल-फितर का जश्न मनाया जा रहा है। अगले कई दिनों तक मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्यौहार को पूरे जोश और उत्साह से मनाएंगे। एक माह तक अल्लाह की ईबादत वाले माह रमजान के बाद आने वाली ईद हर किसी को खुशी के अलग एहसास से भर देती है। चाहे गरीब हो या अमीर यह त्यौहार हर किसी को अलग खुशी देता है। खास बात ये है कि ईद में मुस्लिमों के अलावा काफी संख्या में दूसरे धर्मों के लोग भी शिरकत करते हैं और मुस्लिमों को बधाई देते हैं। लेकिन इनमें से कम लोग ही जानते होंगे की ईद क्यों मनाई जाती है, रमजान के महीने में रोजे क्यों रखे जाते हैं, क्यों लोग चांद देखकर ही ईद की घोषणा करते हैं? आइए आज हम आपको कुछ ऐसे ही सवालों के जवाबों से रूबरू कराते हैं...

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क्यों मनाई जाती है ईद?

eid celebrations - फोटो : ani
मुस्लिमों के लिए दो ही दिन विशेष खुशी वाले होते हैं ईद उल फितर और ईद उल जुहा (अजहा)। रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद इसकी समाप्ति के रूप में ईद मनाई जाती है। ईद अल्लाह से ईनाम लेने का दिन है। ईद मनाने से पहले एक परंपरा निभाई जाती है जिसे फितरा कहा जाता है, इसके तहत ईद मनाने वाले हर मुस्लिम को अपने पास से गरीबों को कुछ अनाज देना जरूरी होता है जिससे वह भी खुशी से ईद मना सके।

कब मनाई गई पहली ईद

ईद - फोटो : अमर उजाला
ये सवाल कई बार सामने आता है कि आखिर पहली ईद कब मनाई गई। इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सेन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी। यह कुछ-कुछ हिंदूओं के दीपावली की तरह है जब भगवान राम के लंका विजय के बाद पहली बार दीपोत्सव की शुरूआत हुई थी, जो बाद में दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा।


 

चांद देखकर ही क्यों मनाते हैं ईद

eid 2018
रमजान के महीने के बाद चांद देखकर ही ईद की शुरूआत होती है। असल में त्यौहारों में चांद का बड़ा महत्व है, हिंदुओं में भी कई त्यौहार चांद देखकर ही मनाए जाते हैं। ईद का चांद से बड़ा गहरा संबंध है। ईद उल फितर हिजरी कैलेंडर के दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती है और इस कलेंडर में नया महीना चांद देखकर ही शुरू होता है। ईद भी रमजान के बाद नए महीने की शुरूआत के रूप में मनाई जाती है जिसे शव्वाल कहा जाता है। जब तक चांद न दिखे रमजान खत्म नहीं होता और शव्वाल शुरू नहीं हो सकता। वैसे इसका संबंध एक एतिहासिक घटना से भी है। कहा जाता है कि इसी दिन हजरत मुहम्मद ने मक्का शहर से मदीना के लिए कूच किया था। 

ईद पर क्या हैं जरूरी काम

eid - फोटो : PTI
यूं तो ईद खुशियां मनाने का त्यौहार है, लेकिन कुछ नियम भी हैं जिनका पालन इस दिन करना जरूरी होता है। मसलन ईद वाले दिन की शुरूआत सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने से होती है। उसके बाद खुद की सफाई जैसे, गुस्ल और मिस्वाक करना। इसके बाद साफ कपड़े पहनना सबसे साफ फिर उन पर इत्र लगाना और कुछ खाकर ईदगाह जाना। नमाज से पहले फिकरा करना भी जरूरी होता है। ईद की नमाज खुले में ही अदा की जाती है। सबसे खास बात ये है कि ईदगाह आने और जाने के लिए अलग अलग रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। 
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क्या सिर्फ नए कपड़े पहनने ही जरूरी?

Eid 'Beti Bachao-Beti Padhao' message - फोटो : अमर उजाला
ईद को लेकर एक बात ये भी कही जाती है कि इस दिन नए कपड़े पहनने जरूरी होता है। हालांकि यह बता सत्य नहीं है, ईद पर साफ कपड़े जरूरी होते हैं नए नहीं। साफ भी वो जो सबसे साफ हों, इसलिए नए कपड़े पहनने की कोई बाध्यता नहीं है। कपडों पर इत्र लगाने की भी परंपरा है, लेकिन यह भी जरूरी नहीं है।
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