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कोरोना का असर: 200 से भी कम आईआईटीयन को मिली विदेश में नौकरी, देश में भी पैकेज घटे

Fri, 02 Jul 2021 12:05 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना महामारी का असर समूचे विश्व के अर्थतंत्र पर भी पड़ा है। देश के शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थानों से इस साल निकले ग्रेजुएट्स को विदेशों में नौकरी के कम प्रस्ताव मिले तो देश में उनके पैकेज भी घट गए। 
 
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आईआईटी-बॉम्बे - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना महामारी का असर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों आईआईटी से इस वर्ष पासआउट हुए विद्यार्थियों के रोजगार अवसरों पर भी पड़ा है। इस साल 200 आईआईटीयन को हो ही विदेशों में रोजगार के मौके मिले हैं। जबकि पिछली बार अकेले बॉम्बे आईआईटी के ही 159 विद्यार्थी चुने गए थे। 

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विदेशों में तो प्लेसमेंट कम हुआ ही है, देश की अग्रणी कंपनियों ने भी आईआईटी से निकले फ्रेश विद्यार्थियों के पैकेज को घटा दिया। इससे विद्यार्थियों को दोहरी मार झेलना पड़ रही है। 

इस साल आईआईटी बॉम्बे के 58 स्नातकों को सिर्फ इंटरनेशनल प्लेसमेंट मिले हैं, जबकि पिछले साल 159 को प्लेसमेंट मिले थे। इसी तरह आईआईटी कानपुर के ग्रेजुएट्स की संख्या भी घटी है। आईआईटी दिल्ली के 45 स्नातकों को 2019 में विदेशों में रोजगार मिले थे, लेकिन इस बार पिछले तीन साल के औसत 30 के आसपास ही है। आईआईटी रुड़की का भी विदेश में प्लेसमेंट कम हुआ है। कुछ आईआईटी ने इस बारे में सूचनाएं साझा नहीं की हैं। 
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जहां तक पैकेज की बात है, आईआईटी रुड़की में यह सालाना 153.97 लाख रुपये से घटकर 69.05 लाख रुपये सालाना रह गया। जबकि आईआईटी-बॉम्बे में 2019 और 2020 में यह 1.64 लाख अमेरिकी डॉलर पर स्थिर था, लेकिन इस साल यह घटकर 1.57 लाख यूरो दर्ज किया गया।

कोरोना के कारण कम मिले आफर
आईआईटी गुवाहाटी के फैकल्टी कोऑर्डिनेटर, प्लेसमेंट बिथिया ग्रेस जगन्नाथन का कहना है कि महामारी और यात्रा प्रतिबंधों के कारण इस साल विदेशों में नौकरी के आफर कम मिले हैं। उम्मीद है कि निकट भविष्य में बाजार में फिर से जान आ जाएगी और अगले प्लेसमेंट सीजन की शुरुआत तक कारोबार सामान्य हो जाएगा। 

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