केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' अधिकारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन काम कर गया है। पदोन्नति की मांग को लेकर सप्ताह में एक दिन काली ड्रेस पहनकर दफ्तर आना और विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के बाहर प्रदर्शन करना, इसका असर देखने को मिला है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग 'डीओपीटी' की सचिव 'एस राधा चौहान' ने सीएसएस फोरम के पदाधिकारियों के साथ मुलाकात कर जल्द से जल्द इस मुद्दे को हल करने का आश्वासन दिया है। सीएसएस फोरम ने भी 17 मई को एक पत्र, सचिव डीओपीटी को भेजा है। इसमें सीएसएस फोरम ने उन सभी कारणों का उल्लेख किया है, जिसके चलते पिछले छह साल से नियमित पदोन्नति नहीं दी जा रही है। इस समस्या का हल जल्द से जल्द कैसे हो सकता है, फोरम ने इस बाबत कई ठोस सुझाव दिए हैं।
यूपीएससी व डीओपीटी के बीच समन्वय करेंगे ये अधिकारी
पदोन्नति मामले का हल तलाशने के लिए यूपीएससी और कैडर यूनिट यानी डीओपीटी के बीच समन्वय करने के लिए दो सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) के महासचिव मनमोहन वर्मा और सचिव अश्वनी यादव सचिव शामिल हैं। महासचिव मनमोहन वर्मा के अनुसार, डीओपीटी की नई सचिव ने सीएसएस फोरम से बातचीत कर पदोन्नति मामले को लेकर चल रहे गतिरोध को समाप्त करने का आग्रह किया है।
ये हैं केंद्रीय सचिवालय सेवा के लम्बित मुद्दे
सचिवालय के अनुभाग अधिकारी से लेकर निदेशक तक के सभी ग्रेड में नियमित प्रमोशन शुरू करना, सीएसएस को संगठित सेवा के दायरे में लाकर एनएफयू एवं एनएफएसजी का लाभ देना, एक अक्तूबर को केंद्रीय सचिवालय सेवा दिवस की आधिकारिक घोषणा करना, वर्ष 2018 से 2022 तक लम्बित अनुभाग अधिकारी के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित कराना, केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए केंद्र के ही कार्यालय में 9 वर्ष का प्रतिनियुक्ति क्लोज हटाना और कार्मिक मंत्रालय के साथ नियमित मासिक रिव्यू मीटिंग का आयोजन करना, ये बातें मुख्य मुद्दों में शामिल हैं।
मनमोहन वर्मा के मुताबिक, अधिकारियों में पदोन्नति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से उनकी पदोन्नति बंद है। अधिकारियों ने डीओपीटी सचिव को न केवल समस्याएं बताई हैं, बल्कि उनके हल का रास्ता भी सुझाया है। जिन अधिकारियों की पदोन्नति के लिए 'डीपीसी' पहले ही हो चुकी है, उनके पदोन्नति आदेश तत्काल प्रभाव से जारी किए जाएं।
बिना प्रमोशन मिले ही रिटायर हो रहे हैं सीएसएस अधिकारी
सीएसएस फोरम का कहना है कि अनेक अधिकारी, बिना प्रमोशन मिले ही रिटायर हो रहे हैं। उन्हें किसी तरह का कोई वित्तीय लाभ भी नहीं मिल सका। सीएसएस में मौजूदा पदों की स्वीकृत संख्या 'एसओ' 3600, यूएस 1900, डिप्टी सेक्रेटरी/डायरेक्टर 780, जेएस (मूल स्थान पर) 40 है। पदों की कुल संख्या 6320 है। इनमें रिक्त स्थानों की बात करें तो सेक्शन अफसर के 1600 पद, अंडर सेक्रेटरी के 200 पद, डिप्टी सेक्रेटरी/डायरेक्टर के 160 पद शामिल हैं। इस तरह से कुल 1960 पद रिक्त हैं। सीएसएस में एडहॉक डेटा के अंतर्गत एसओ-1162, यूएस-1001 व डिप्टी सेक्रेटरी/डायरेक्टर के 607 पद हैं। एसओ के 6320 पदों में से 1960 पद रिक्त हैं। जो 4370 पद भरे हुए हैं, उनमें भी 2770 पद एडहॉक वाले हैं।
सीएसएस अधिकारियों को दी जाए नियमित पदोन्नति
फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि वे पदोन्नति के लिए तय विभागों के बीच समन्वय कर रहे हैं। उन्हें पदोन्नति चाहिए, चाहे वह नियमित हो या एडहॉक पर। डीओपीटी सचिव ने इसके लिए एक केलेंडर तैयार करने की बात कही है। इसी के जरिए पदोन्नति की रूपरेखा तय होगी। उम्मीद है 30 जून तक पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी हो जाए। इसके लिए छुट्टी के दिन भी काम किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी ग्रेड में परमोशन ऑर्डर नहीं लगा है। हर ग्रेड में पदोन्नति होना जरुरी है। नियमित पदोन्नति 6 साल से बंद होने के कारण अनेक अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। उन्हें न तो पदोन्नति मिली और न ही वित्तीय फायदा। सचिव ने आंदोलन वापस लेने की बात कही है। इस बाबत फोरम का कहना है, आंदोलन पूरी तरह से वापस नहीं लिया जाएगा। सीएसएस अधिकारी, सप्ताह में एक दिन विरोध स्वरूप काले कपड़े पहनकर आएंगे। यह पदोन्नति 30 जून से पहले मिलनी चाहिए, तब अधिकारियों को वित्तीय नुकसान नहीं होगा। एक जुलाई के बाद इंक्रीमेंट का नुकसान संभव है।