एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने 9 नवंबर को एक दिन के लिए एनडीटीवी इंडिया न्यूज चैनल को बैन करने के आदेश की निंदा की है। गिल्ड के मुताबिक सरकार को न्यूज चैनल पर बैन रद्द करना चाहिए। गिल्ड की तरफ से जारी के एक बयान में कहा गया ''सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से न्यूज चैनल पर लगाया गया बैन आपातकाल की याद दिलाता है। यह सरासर मीडिया की आजादी और लोगों की स्वतंत्रता का हनन है।''
गिल्ड ने यह भी कहा कि सरकार के पास चैनल को बैन करने के अलावा और भी तरीके है जिनसे गैर जिम्मेदाराना कवरेज की भरपाई की जा सकती है।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के लिए पाबंदी लगाने के केंद्र सरकार के फैसले की खिंचाई करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि देश में आपातकाल जैसे हालात हैं। शुक्रवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि एनडीटीवी पर लगी पाबंदी से उनको झटका लगा है। अगर सरकार को पठानकोट हमलों की कवरेज पर कोई आपत्ति थी तो इसके लिए संबंधित प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता था। लेकिन पाबंदी से आपातकाल जैसे रुख का पता चलता है।
गुरुवार को मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा था कि एनडीटीवी इंडिया ने पठानकोट हमले से जुड़ी ऐसी जानकारियां उजागर की हैं जिससे राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। मंत्रालय ने यह कार्रवाई एक समिति की सिफारिश पर की है। समिति का गठन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने किया था।
NDTV के खिलाफ कार्रवाई पर एडिटर्स गिल्ड ने कहा, सेंसरशिप एमरजेंसी के दिनों जैसी https://t.co/gjHqBufgDu pic.twitter.com/Kj0LjaIIRX
— NDTVIndia (@ndtvindia) November 4, 2016
''चैनल ने गोला-बारूद के भंडारण की जानकारी का खुलासा किया था''
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार समिति ने अपनी जांच में पाया है कि 'एनडीटीवी इंडिया' ने पठानकोट में वायुसेना बेस पर आतंकी हमले के दौरान महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक रूप से संवेदनशील सूचनाओं का प्रसारण किया था। समिति की सिफारिश पर मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए पूरे देश में एक दिन के लिए चैनल के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश में चैनल को 9 नवंबर 2016 को रात 12:01 बजे से 10 नवंबर 2016 को रात 12:01 बजे तक प्रसारण बंद रखने को कहा गया है। आतंकी हमले की कवरेज के मामले में किसी चैनल के खिलाफ की गई यह अपनी तरह की पहली कार्रवाई है। इस आशय के मानदंडों को पिछले साल अधिसूचित किया गया था। इस मामले में पक्ष जानने के लिए चैनल से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
समिति का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील जानकारियों का लाभ उठाकर आतंकी सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि नागरिकों और जवानों की जान को भी क्षति पहुंचा सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि जनवरी में आतंकी हमले के दौरान तथाकथित तौर पर चैनल ने एयरबेस में गोला-बारूद के भंडारण की जानकारी का खुलासा किया था। इसके साथ ही चैनल ने मिग, लड़ाकू विमानों, रॉकेट लॉचर, मोर्टार, हेलीकॉप्टर और फ्यूल टैंक आदि की जानकारी का प्रसारण किया था। ऐसे में आतंकी और उनके हैंडलर सूचनाओं का लाभ उठाकर भारी नुकसान पहुंचा सकते थे।
''प्रिंट, इलेक्ट्रिॉनिक और सोशल मीडिया पहले ही दिखा चुका था सबकुछ''
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चैनल ने जो कंटेंट प्रसारित किया था वह मानदंडों का उल्लंघन था। इस मामले में चैनल को जनवरी में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब में चैनल ने कहा था कि यह सिर्फ व्यक्तिपरक व्याख्या का मामला है और उसने जिन सूचनाओं का प्रसारण किया था वह पहले से ही प्रिंट, इलेक्ट्रिॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक हो चुके थे।
हरहाल, समिति ने कहा है कि चैनल ने गोला-बारूद रखे जाने के सही स्थान के साथ ही इस बात का भी खुलासा कर दिया था कि आतंकी किस स्थान पर छिपे हैं, कहां स्कूल है और कहां रिहायशी इलाका। समिति का कहना है कि चैनल द्वारा ऐसा करना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।