केरल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए राज्य में आई बाढ़ के लिए तमिलनाडु को भी जिम्मेदार बताया था। केरल सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि तमिलनाडु द्वारा मुल्लापेरियार बांध के जल स्तर को कम करने से इनकार करने के कारण यह त्रासदी हुई, जिसमें 373 लोगों की जान चली गई। सुपीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केरल सरकार ने कहा कि मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ने के कारण यह आपदा आई।
सरकार का कहना है कि उसके बार-बार आग्रह करने के बावजूद तमिलनाडु ने बांध का जल स्तर 142 फीट से 139 फीट नहीं किया। आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
इडापड्डी पलानीस्वामी ने इस आरोप को झूठा और आधारहीन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, यदि आप कहते हैं कि ज्यादा पानी एक बांध मुल्लापेरियार से छोड़ा गया था तो कैसे पानी पूरे केरल में पहुंच गया? 80 बांधों से अतिरिक्त पानी बहे जाने की वजह से केरल में बाढ़ आई।
पलानीस्वामी ने आगे कहा, मुल्लापेरियार बांध से पानी को एक हफ्ते बाद छोड़ा गया था जब
केरल में बाढ़ आ चुकी थी। ऐसा तुरंत नहीं किया गया। 3 चेतावनी जारी की गई थी। पहली 139 फीट पर, दूसरी 141 फीट पर और तीसरी चेतावनी 142 फीट पर दी गई। पानी को चरणबद्ध तरीके से जारी किया गया था। बता दें कि केरल में आई बाढ़ की वजह से 54 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि उसके इंजीनियरों द्वारा पहले से आगाह किए जाने की वजह से राज्य के जल संसाधन सचिव ने तमिलनाडु सरकार में अपने समकक्ष और मुल्लापेरियार बांध की निगरानी समिति को पत्र लिखा था। पत्र में उनसे विनती की गई थी कि जलाशय के जलस्तर को अधिकतम स्तर तक पहुंचने का इंतजार किए बगैर ही इससे पानी छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाए।