विजय माल्या के बैंक धोखाधड़ी मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने ईडी के पास जब्त संपत्ति में से 5646.54 करोड़ रुपये की संपत्ति बैंकों को सौंपने का आदेश दिया।
पीएमएलए कोर्ट के जज जेसी जगदाले ने कहा, मौजूदा स्थिति में बैंकों के असल नुकसान का आकलन करना मुश्किल है लेकिन बैंकों का 6200 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा काल्पनिक भी नहीं है। ईडी के पास जब्त संपत्ति बैंकों को सौंपने की अनुमति देने वाले कोर्ट के पिछले हफ्ते के दो आदेश बुधवार को सामने आए हैं।
कोर्ट ने आदेश में कहा, गौर करने की बात है कि दावा करने वाले बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं और ये जनता के पैसे में डील करते हैं। ऐसे में बैंकों के दावे में कोई निजी हित नहीं हो सकता। माल्या ने खुद इस संपत्ति से बैंकों को पैसे लौटाने की पेशकश की है। अगर बैंकों को नुकसान नहीं हुआ होता तो माल्या ऐसा क्यों करता।
कोर्ट ने 24 मई को 4234.84 करोड़ रुपये व 1 जून को 1411.70 करोड़ की संपत्ति बैंकों को देने का आदेश दिया था। हालांकि माल्या के वकीलों की टीम ने कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी है।
माल्या मामले में बैंकों का 6200 करोड़ नुकसान का दवा काल्पनिक नहीं: कोर्ट
विजय माल्या के बैंक धोखाधड़ी मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने कहा, बैंकों का 6200 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा काल्पनिक नहीं। लेकिन मौजूदा स्थिति में असल नुकसान का आकलन कर पाना मुश्किल है।
पीएमएलए कोर्ट के जज जेसी जगदाले ने बैंकों के समूह को ईडी द्वारा जब्त माल्या की संपत्ति की बहाली करने की अनुमति देने वाले आदेश में यह टिप्पणी की है। पिछले हफ्ते में कोर्ट के ऐसे दो आदेश बुधवार को सामने आए हैं।
कोर्ट ने आदेश में कहा, गौर करने की बात है कि दावा करने वाले बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं और ये जनता के पैसे में डील करते हैं। ऐसे में बैंकों के दावे में कोई निजी हित नहीं हो सकता। माल्या ने खुद इस संपत्ति से बैंकों को पैसे लौटाने की पेशकश की है। अगर बैंकों को नुकसान नहीं हुआ होता तो माल्या ऐसा क्यों करता।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक बैंकों को सौंपी जाने वाली माल्या की जब्त संपत्ति की कूल कीमत करीब 5646.54 करोड़ रुपये होगी। माल्या के खिलाफ बैंको से 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला है। कोर्ट ने 24 मई को 4234.84 करोड़ रुपये व 1 जून को 1411.70 करोड़ की संपत्ति बैंकों को देने का आदेश दिया था। हालांकि माल्या के वकीलों की टीम ने कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी है।