आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह के खिलाफ ईडी ने असम और दिल्ली में छापेमारी की। इस दौरान 13 लाख रुपये नकद, तीन लग्जरी कारें और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए सट्टा गिरोह चलाते थे। एजेंसी ने अवैध लेनदेन वाले बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को बताया कि उसने आईपीएल क्रिकेट सट्टेबाजी गिरोह से जुड़े धन शोधन मामले में असम और दिल्ली में रात भर छापेमारी की। यह तलाशी अभियान 26 मई की देर रात शुरू हुआ था। ईडी की टीमों ने गुवाहाटी, तिनसुकिया और नई दिल्ली में संदिग्धों के ठिकानों पर कार्रवाई की। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के नियमों के तहत की गई।
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यह जांच गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस की एक एफआईआर से शुरू हुई थी। इस एफआईआर में दीपेश बाजोरिया, रौनक बाजोरिया, राजेश जैन और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इन पर असम गेम एंड बेटिंग एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं। बाद में ईडी ने तिनसुकिया पुलिस स्टेशन में दर्ज दो और एफआईआर को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया। ये मामले एक आपस में जुड़े हुए सिंडिकेट से संबंधित थे जो आईपीएल सट्टेबाजी का काम देख रहे थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी एक बहुत ही संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत सट्टेबाजी गिरोह चला रहे थे। वे आईपीएल मैचों पर सट्टा लेने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे ऐप का उपयोग करते थे। इसके अलावा विदेशी ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल होता था। सट्टेबाजी से मिलने वाला पैसा नकद और यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के जरिए लिया जाता था। इस काली कमाई को छिपाने के लिए परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के एक बड़े नेटवर्क का सहारा लिया गया। यह नेटवर्क गुवाहाटी, तिनसुकिया और दिल्ली तक फैला हुआ था।
ईडी ने गुवाहाटी में 'रॉयसी' (जिसे पहले 'प्लेबॉय' कहा जाता था) नाम के एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आरोपियों के घरों की तलाशी ली। इस दौरान कई मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले। इनमें सट्टेबाजी के लेनदेन और एजेंटों के साथ कोड भाषा में की गई बातचीत के सबूत मिले हैं। छापेमारी में 13 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई। इसके अलावा तीन महंगी गाड़ियां-मर्सिडीज-बेंज, एमजी हेक्टर और टोयोटा फॉर्च्यूनर भी जब्त की गईं। ईडी को शक है कि ये गाड़ियां अपराध की कमाई से खरीदी गई थीं। एजेंसी ने उन बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है जिनका इस्तेमाल अवैध सट्टेबाजी और पैसों के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।