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ED: अपराध की आय को सफेद करने के लिए बनाई मुखौटा कंपनियां; बैंकों में 116 खाते फ्रीज, हजारों निवेशकों से की ठगी

Mon, 07 Jul 2025 07:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र सूद, विनीत कुमार और संतोष कुमार हजारों निर्दोष निवेशकों को ठगने के बाद दुबई फरार हो गए। चल रही जांच से ऐसी और भी शेल कंपनियों, बेनामी संपत्तियों और जटिल लेयरिंग नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है, जिनका इस्तेमाल निर्दोष निवेशकों से ठगे गए धन की उत्पत्ति को छिपाने के लिए किया जाता है।
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने चार जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ में स्थित तीन संदिग्ध शेल कंपनियों - किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, रेनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। कंपनियों का संचालन डमी निदेशकों द्वारा किया जा रहा था। वे वॉलेट-आधारित एपीआई, घरेलू धन हस्तांतरण (डीएमटी), आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) और बिल भुगतान समाधान की पेशकश करने वाली आईटी फर्म के रूप में प्रस्तुत हो रही थीं। प्रबंधन यह प्रमाणित नहीं कर सका कि उनके द्वारा की जाने वाली गतिविधियाँ आरबीआई द्वारा विनियमित ढांचे के भीतर हैं। जांच में सामने आया कि अपराध की आय को सफेद करने के लिए मुखौटा कंपनियां बनाई गई थी। हजारों निवेशकों के साथ ठगी हुई है। ईडी ने बैंकों में 116 खाते फ्रीज किए हैं। 

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ईडी के मुताबिक, जांच में देखा गया है कि ये कंपनियां वास्तव में करोड़ों रुपये के क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स ऑनलाइन विदेशी मुद्रा और एमएलएम (मल्टी लेवल मार्केटिंग) घोटाले के माध्यम से उत्पन्न अपराध की आय (पीओसी) को सफेद करने के लिए मुखौटा थीं। इन्होंने पूरे भारत में हजारों निवेशकों को ठगा है। इन कंपनियों के प्रत्येक कार्यालय में 10-30 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से कई ने स्वीकार किया है कि कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा था। वे अक्सर कंपनी की वास्तविक गतिविधियों से अनजान थे। फर्मों ने देशव्यापी ग्राहक आधार होने का दावा किया था, लेकिन ईडी को ऐसे सबूत मिले हैं जो बताते हैं कि ऐसे कई ग्राहक काल्पनिक हैं और केवल कागजों पर मौजूद हैं। क्यूएफएक्स, वाईएफएक्स वाईओआरकेईआरएफ, टीएलसी कॉइन और बॉटब्रो के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया जा रहा था। ये सभी एक बड़े पैमाने पर अनियमित जमा और एमएलएम धोखाधड़ी में जांच के दायरे में हैं। 

तलाशी वाली कंपनियों के निदेशकों ने इन घोटाले से संबंधित नामों और उनके बैंक खातों में प्राप्त क्रेडिट के साथ किसी भी संबंध से इनकार किया है, जिससे बेनामी परिचालन और मनी लॉन्ड्रिंग लेयरिंग गतिविधि के बारे में संदेह और बढ़ गया है। बरामद साक्ष्यों के आधार पर, ईडी ने इन संस्थाओं से जुड़े कई बैंकों में 116 खाते फ्रीज कर दिए हैं। 16 बैंक खातों से अब तक प्राप्त पुष्टि के अनुसार, 103 करोड़ रुपये से अधिक की पीओसी फ्रीज की गई है। परिसर से कई डिजिटल उपकरण, वित्तीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जब्त किए गए। वर्तमान में पीओसी और घोटाले में शामिल व्यक्तियों का पूरा पता लगाने के लिए रिकॉर्ड को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। ईडी ने फरवरी 2025 में भी तलाशी ली थी। क्यूएफएक्स, यॉर्करएफएक्स और बॉटब्रो आदि से जुड़े कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था, जिससे 187 करोड़ रुपये की पीओसी सुरक्षित हो गई थी। 
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मुख्य मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र सूद, विनीत कुमार और संतोष कुमार हजारों निर्दोष निवेशकों को ठगने के बाद दुबई फरार हो गए। चल रही जांच से ऐसी और भी शेल कंपनियों, बेनामी संपत्तियों और जटिल लेयरिंग नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है, जिनका इस्तेमाल निर्दोष निवेशकों से ठगे गए धन की उत्पत्ति को छिपाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, क्यूएफएक्स घोटाले से पीओसी के धन शोधन की योजना बनाने और उसे सुविधाजनक बनाने में शामिल अतिरिक्त व्यक्तियों, मास्टरमाइंड, ऑपरेटरों, लाभार्थियों और फ्रंट एंड फैसिलिटेटर्स का भी पता चलने की संभावना है।

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