पाटकर और मामले के एक अन्य आरोपी किशोर बिसुरे को बृहस्पतिवार को उनकी पिछली हिरासत अवधि समाप्त होने पर विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश एमजी देशपांडे के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने पाटकर की ईडी में हिरासत की अवधि एक अगस्त तक बढ़ा दी, जबकि बिसुरे को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया
प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने कोविड घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने एक विशेष अदालत में बताया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत के एक करीबी मित्र और कारोबारी सुजीत पाटकर ने मुंबई में कोविड-19 उपचार केंद्रों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं से संबंधित आपराधिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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विशेष अदालत में गुरुवार को ईडी ने कहा कि पाटकर ने अपनी कंपनी के अन्य भागीदारों के साथ-साथ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश की थी।
इस कथित घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में व्यवसायी की हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए ईडी ने कहा कि 19 जुलाई को गिरफ्तार किए गए पाटकर को अपनी कंपनी ‘लाइफलाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट सर्विसेज (एलएचएमएस)’ से अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में अपराध की आय की ‘पर्याप्त’ राशि प्राप्त हुई थी।
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पाटकर और मामले के एक अन्य आरोपी किशोर बिसुरे को बृहस्पतिवार को उनकी पिछली हिरासत अवधि समाप्त होने पर विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश एमजी देशपांडे के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने पाटकर की ईडी में हिरासत की अवधि एक अगस्त तक बढ़ा दी, जबकि बिसुरे को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया क्योंकि जांच एजेंसी ने उनकी और हिरासत की मांग नहीं की थी। केंद्रीय एजेंसी ने दोनों को 19 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था।