तमिलनाडु के गिरफ्तार मंत्री वी सेंथिल बालाजी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच का विस्तार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उनके भाई और परिवार के दो अन्य सदस्यों ने कई समन को दरकिनार किया। साथ ही ईडी ने आरोप लगाया कि सबूत बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में अपराध की आय को कम करने और एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रवर्तन निदेशालय ने एक बयान में कोच्चि (केरल) से मंत्री के भाई आरवी अशोक कुमार की हिरासत या गिरफ्तारी के बारे में स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में छपी खबरों को "झूठा" करार दिया। बयान में कहा गया, यह स्पष्ट किया जाता है कि आरवी अशोक कुमार को ईडी ने न तो हिरासत में लिया है और न ही गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि अशोक, उनकी पत्नी निर्मला और सास पी लक्ष्मी को पहले कम से कम चार समन भेजे गए थे, लेकिन वे ईडी के सामने पेश नहीं हुए।
बालाजी को जून में कैश-फॉर-जॉब घोटाले से जुड़ी जांच में कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने कहा कि इस जांच के तहत अशोक कुमार को चार मौकों- 16 जून, 21 जून, 29 जून और 15 जुलाई, 2023 को बुलाया गया था, लेकिन वह कभी भी जांच में शामिल नहीं हुए और उन्होंने ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया। समन के जवाब में निरर्थक और अप्रासंगिक बहानों का हवाला दिया गया।
बयान में कहा गया है कि इसी तरह उनकी पत्नी निर्मला और सास पी लक्ष्मी ने भी चार व्यक्तिगत समन का पालन नहीं किया। ईडी ने आरोप लगाया, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सबूत इशारा करते हैं कि सभी तीन व्यक्तियों ने अपराधों की आय को कम करने और एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
करूर में स्थित 2.49 एकड़ जमीन पी लक्ष्मी द्वारा अधिगृहीत की गई थी। इस जमीन की कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक है।पी लक्ष्मी ने बाद में इसे अपनी बेटी निर्मला को उपहार में दे दिया था, जिसे जांच के हिस्से के रूप में पिछले सप्ताह ईडी ने फ्रीज कर दिया था। एजेंसी ने पिछले हफ्ते सेंथिल बालाजी के खिलाफ लगभग 3,000 पेज का आरोपपत्र भी दायर किया था, क्योंकि चेन्नई की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें 25 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। मंत्री चेन्नई की पुझल केंद्रीय जेल में बंद हैं।
बता दें कि पिछली अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकार में परिवहन मंत्री रहने के दौरान हुए कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाले के सिलसिले में उन्हें ईडी ने 14 जून को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बावजूद बालाजी मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार में बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं।