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गोवा नाइट क्लब अग्निकांड: ईडी ने की नौ ठिकानों पर रेड, जानिए कैसे हुई 22 करोड़ रुपये की कमाई

Sun, 25 Jan 2026 02:35 PM IST
देवेश त्रिपाठी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

तलाशी अभियान के दौरान यह पता चला कि बिर्च बाय रोमियो लेन का संचालन करने वाली संस्था ने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान लगभग 22 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। जांच एजेंसी ने जब इस संबंध में दस्तावेज खंगाले तो मालूम पड़ा कि यह कमाई 'अपराध की आय' प्रतीत होती है।
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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अरपोरा, गोवा स्थित नाइट क्लब 'बर्च' (रोमियो लेन), जहां एक दुखद अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हो गई थी, इसके मालिक ईडी के रडार पर आ हैं। जांच एजेंसी 'ईडी' ने गोवा, नई दिल्ली और गुरुग्राम में स्थित नौ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है। जांच में पता चला है कि क्लब के मालिक, कथित धन शोधन गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इस क्लब ने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान लगभग 22 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। प्रथम दृष्टया, यह राजस्व 'अपराध की आय' दिखता है। वजह यह क्लब आवश्यक वैधानिक लाइसेंसों के बिना और विभिन्न विभागों से जाली अनापत्ति प्रमाण पत्रों/लाइसेंसों के आधार पर चल रहा था। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत हुई रेड में अरपोरा-नागाओ पंचायत के सरपंच और सचिव का परिसर भी शामिल है। यह तलाशी सौरभ लूथरा और अन्य के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में की गई है। तलाशी अभियान अरपोरा, गोवा स्थित नाइट क्लब 'बर्च' (रोमियो लेन) के मालिकों से जुड़े कथित धन शोधन गतिविधियों की जांच का हिस्सा है, जहां एक दुखद अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हो गई थी।

22 करोड़ की कमाई की क्या है कहानी?
ईडी ने इस केस की जांच, गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इसमें पीएमएलए के तहत कुछ अनुसूचित अपराध शामिल हैं। तलाशी अभियान में वैधानिक अनुपालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें जाली दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त करना और सक्षम अधिकारियों से अनिवार्य अनुमोदन के अभाव में व्यावसायिक गतिविधियों का निरंतर संचालन करना शामिल है। 
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तलाशी अभियान के दौरान यह पता चला कि बिर्च बाय रोमियो लेन का संचालन करने वाली संस्था ने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान लगभग 22 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। जांच एजेंसी ने जब इस संबंध में दस्तावेज खंगाले तो मालूम पड़ा कि यह कमाई 'अपराध की आय' प्रतीत होती है। ये क्लब आवश्यक वैधानिक लाइसेंसों के बिना चल रहा था। 

लाइसेंस समेत तमाम दस्तावेज निकले फर्जी
इसके संचालन के लिए जिन विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र/लाइसेंस लिया गया, वह फर्जी था। तलाशी के दौरान समूह की संस्थाओं के माध्यम से भेजे गए विदेशी धन से संबंधित साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। ईडी द्वारा संबंधित कानूनों के संभावित उल्लंघनों की जांच की जा रही है। प्रतिष्ठान के अवैध संचालन से अर्जित करोड़ों रुपये की धनराशि व्यक्तियों के निजी बैंक खातों के साथ-साथ समूह की अन्य संस्थाओं के खातों में भी स्थानांतरित की गई थी। तलाशी के दौरान जांच से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद और जब्त किए गए। 

इसके अतिरिक्त, अपराध की आय को रखने में संलिप्त होने के संदेह वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत फ्रीज कर दिया गया है। जांच में भ्रष्टाचार के किसी भी संभावित पहलू और अपराध से प्राप्त धन की मनी लॉन्ड्रिंग की भी पड़ताल की जा रही है। इसमें अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं। गोवा पुलिस ने हाल ही में ऐसे दो व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया है। 
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