प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 988 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में बुधवार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और पंजाब में कई जगहों पर छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शिल्पी केबल्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (एसीटीएल) कंपनी के प्रवर्तकों और कुछ संबद्ध संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।
कंपनी ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर के लिए तार और केबल डिजाइन और निर्माण करती है। उक्त कंपनी के खिलाफ 2017 में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की गई थी। धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दिल्ली-एनसीआर में नौ ठिकानों और जालंधर में एक परिसर पर छापे मारे गए। ईडी ने इस मामले में पहले दौर की तलाशी दिसंबर, 2024 में की थी।
सूत्रों के अनुसार, ईडी को संदेह है कि एलएससी (लेटर्स ऑफ क्रेडिट) का उपयोग करके बैंकों से प्राप्त धन (ऋण) का एक बड़ा हिस्सा फर्जी लेनदेन के माध्यम से विदेशों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनीष गोयल की भूमिका की जांच कर रही है।
गुजरात और महाराष्ट्र में छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को गुजरात और महाराष्ट्र में जालसाजों से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी की। मामला कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध और 100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विदेश में स्थानांतरित करने से जुड़ा हुआ है। गुजरात के सूरत-अहमदाबाद में और मुंबई में संघीय जांच एजेंसी के सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत छापेमारी की गई।
क्या है मामला?
सूत्रों ने बताया कि धन शोधन का मामला गुजरात पुलिस की ओर से मकबूल डॉक्टर, काशिफ डॉक्टर, बासम डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई, माज अब्दुल रहीम नाडा और कुछ अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर से उपजा है।
आम जनता को ठगने का आरोप
उन्होंने बताया कि आरोपियों पर फर्जी यूएसडीटी ट्रेडिंग (क्रिप्टो करेंसी), डिजिटल अरेस्ट, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के फर्जी नोटिस भेजकर निर्दोष व्यक्तियों को धमकाने जैसे विभिन्न साइबर धोखाधड़ी के जरिए आम जनता को ठगने का आरोप है।
100 करोड़ से अधिक की धनराशि विदेश भेजने का संदेह
इस साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से भोले-भाले व्यक्तियों से प्राप्त धन को फर्जी व्यक्तियों के केवाईसी का उपयोग करके या केवाईसी दस्तावेजों को जाली बनाकर खोले गए बैंक खातों में एकत्र किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, अवैध धन को विभिन्न 'अंगड़िया' या हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी में बदला गया। उन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विदेश भेजने का संदेह है।
निजी इंजीनियरिंग सीट ब्लॉकिंग 'घोटाला' मामले में भी ईडी की छापेमारी
इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बंगलूरू के कुछ निजी कॉलेजों में कथित इंजीनियरिंग सीट ब्लॉकिंग घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कई स्थानों पर छापेमारी की। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और न्यू होराइजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जैसे कॉलेजों के परिसरों, बीएमएस के ट्रस्टियों और उनके मुख्य सहयोगियों के अलावा कुछ शिक्षा सलाहकारों और एजेंटों की तलाशी ली गई।