राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस साल अभी तक विपक्ष के पास अपनी एकता दिखाने के चार मौके आए हैं। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल इन्हें भुनाने से चूक गए। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता की पोल खुल गई थी। अब उपराष्ट्रपति चुनाव में जनता दल (जेडीयू), वाईएसआर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अन्नाद्रमुक, लोक जनशक्ति पार्टी और शिवसेना जैसे कई अन्य दलों ने एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को समर्थन दे दिया। तृणमूल कांग्रेस ने यह कह कर उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने की बात कही कि विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा के नाम की घोषणा से पहले उससे नहीं पूछा गया। उपराष्ट्रपति चुनाव के मतदान से एक दिन पहले ममता बनर्जी, पीएम मोदी से मिलीं। इस बैठक को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए गए। वजह, पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी, ईडी के शिकंजे में फंस चुके हैं।
कई विपक्षी नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार
सोनिया गांधी की पहली पेशी के दौरान कई प्रमुख विपक्षी दलों ने बैठक की थी। इनमें शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, माकपा, भाकपा, नेशनल कांफ्रेंस और द्रमुक सहित दर्जनभर पार्टियों के नेता शामिल थे। इन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने कहा, मोदी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई कर रही है। हालांकि यह विपक्षी एकता बैठक तक ही सीमित रही। संसद में कुछ दल महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के साथ आए, लेकिन प्रदर्शन से उन्होंने दूरी बना ली। नतीजा, कांग्रेस पार्टी इस विरोध प्रदर्शन के मोर्चे पर अकेली पड़ती हुई नजर आई। चूंकि दूसरे विपक्षी दल, कांग्रेस द्वारा आयोजित महंगाई के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, तो भाजपा को भी निशाना साधने का मौका मिल गया। भाजपा नेताओं ने कहा, ये महंगाई के लिए प्रदर्शन नहीं है, बल्कि 'ईडी' से बचने के लिए कांग्रेस पार्टी, हो हल्ला मचा रही है। यह एक परिवार को भ्रष्टाचार से बचाने की मुहिम है।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था कि सरकार अपनी जांच एजेंसियों की मदद से विपक्ष को एकत्रित नहीं होने दे रही। जैसे ही विपक्षी दल, सरकार को घेरने का प्रयास करते हैं, उन्हें टारगेट पर ले लिया जाता है। शिवसेना के संजय राउत भी ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में टीएमसी के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी ईडी के शिकंजे में हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक भी ईडी के रडार पर हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछताछ हो चुकी है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन, ईडी मामले में हिरासत में हैं। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। महाराष्ट्र में शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। पंजाब के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी से ईडी पूछताछ कर चुकी है। अवैध रेत खनन मामले में उन पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी है।
'भाजपा का 'इलेक्शन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट बनी ईडी'
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, देश में तानाशाही चल रही है। लोकतंत्र खत्म हो चुका है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर राहुल ने कहा, जो डरता है, वहीं धमकाता है। मैं जितने भी जनता के मुद्दे उठाऊंगा, वे मुझ पर हमला करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, हिटलर भी चुनाव जीत लेता था। कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने कहा, विपक्ष को डराया जा रहा है। विपक्षी दलों में ईडी की मदद से भय का माहौल बनाया गया है। जैसे ही विपक्षी दल एक होने का प्रयास करते हैं तो केंद्र सरकार किसी न किसी एजेंसी को उनके नेताओं के पीछे छोड़ देती है।
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, विपक्ष के जो नेता मुंह बंद कर लेते हैं या भाजपा में शामिल हो जाते हैं, वे ईडी की कार्रवाई से बच जाते हैं। यह एजेंसी, भाजपा का 'इलेक्शन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट' बन गई है। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, भाजपा में शामिल हो गए। उनके केसों में जांच एजेंसी शांत है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, नारायण राणे, रमन सिंह, मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी नेता, जिनके पीछे जांच एजेंसी पड़ी रहती थी, आज वे सब बाहर क्यों हैं। उनसे पूछताछ क्यों नहीं हो रही। राजनीतिक जानकारों का कहना है, ईडी का एक फैक्टर हो सकता है, लेकिन विपक्षी दलों को इसके आगे खुद को कमजोर नहीं, बल्कि ताकत दिखानी चाहिए। विपक्ष द्वारा कोई ऐसा सर्वमान्य नेता तलाशना होगा, जो सभी को भाजपा के खिलाफ एक प्लेटफार्म पर ले आए।