प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तमिलनाडु में इंडियन बैंक के पूर्व मैनेजर के. पांड्याराजन की 1.63 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की है। पांड्याराजन के खिलाफ 2.85 करोड़ के लोन धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई।
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत पूर्व बैंक मैनेजर और उसके परिवार के सदस्यों से जुड़ी 22 अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं। इसमें डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और तिरुवल्लूर समेत तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में कृषि भूमि और कई आवासीय प्लॉट शामिल हैं। लोन धोखाधड़ी में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने पूर्व बैंक मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था।
पांड्याराजन ने बैंक मैनेजर रहते 2012-13 में दो लोगों को 2.85 करोड़ के आवासीय लोन को मंजूरी दी थी। इन पैसों का इस्तेमाल कोडैकानल में प्लॉट खरीदने में किया गया। इनमें से कई प्लॉट बैंक मैनेजर पांड्याराजन की पत्नी के नाम पर लिए गए।
ईडी ने पीएनवी साइट्स घपले में दिल्ली की
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की कंपनी ट्राइडेंट इंफोसोल प्राइवेट लिमिटेड की 2.36 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। इस कंपनी ने बिहार पुलिस के लिए राइफलों में फिट होने वाले 100 से अधिक पैसिव नाइट विजन (पीएनवी) साइट्स का अवैध तरीके से आयात किया था।
ईडी ने एक बयान में कहा कि एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कंपनी के 2.08 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपोजिट और बैंक में जमा 28.25 लाख को अटैच करने के लिए अनंतिम आदेश जारी किया था।
ईडी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एलिगेटर्स डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली के निदेशकों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट और एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का आपराधिक मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी ने एसएलआर और अन्य राइफलों के लिए 105 पीएनवी साइट्स का गैरकानूनी ढंग से आयात किया था। यह आयात फर्जी दस्तावेज के आधार पर किया गया। इन पीएनवी साइट्स को बिहार पुलिस को 2.36 करोड़ रुपये में आपूर्ति की गई।
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि एलिगेटर्स डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों नितिन गुप्ता और अन्य मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे। ईडी ने दावा किया कि घपले के बाद एलिगेटर्स डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड अपनी मूल कंपनी ट्राइडेंट इंफोसोल प्राइवेट लिमिटेड में विलय हो गई।
जांच के दौरान कंपनी के निदेशकों और अन्य सहयोगियों ने दस्तावेज की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को कबूल किया। साथ उनके कृत्य की फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई।