प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने टोल वसूली में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि देश के करीब 100 टोल प्लाजा पर वाहन चालकों से कथित तौर पर धोखाधड़ी से टोल वसूला गया। इसके लिए अनधिकृत मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन ऐप के जरिए फर्जी रसीदें तैयार की जाती थीं।
एनएचएआई के सिस्टम से छिपाई गई जानकारी
ईडी के मुताबिक, इस पूरे खेल में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई को जानकारी दिए बिना टोल वसूला जाता था। खासकर उन वाहनों से टोल लिया जाता था, जिनमें फास्टैग नहीं था या खाते में पर्याप्त राशि नहीं थी। अनधिकृत ऐप के जरिए रसीद बनाई जाती और वसूली का रिकॉर्ड आधिकारिक व्यवस्था से छिपा दिया जाता था।
मिर्जापुर से खुला था फर्जीवाड़ा
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर के बाद ईडी की जांच में आया। एफआईआर मिर्जापुर के अट्रैला शिव गुलाम टोल प्लाजा समेत देश के कई टोल प्लाजा पर कथित अवैध वसूली से जुड़ी थी। जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अट्रैला टोल प्लाजा पर इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया था।
‘मोबडेटा’ और ‘एनी’ ऐप का इस्तेमाल
ईडी की जांच में ‘मोबडेटा’ और ‘एनी’ जैसे अनधिकृत ऐप का इस्तेमाल सामने आया है। इनका इस्तेमाल बिना फास्टैग वाले वाहनों से टोल वसूलने में किया जाता था। इस अवैध वसूली की निगरानी के लिए पोर्टल भी चलाए जा रहे थे। जब्त डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में करीब 100 टोल प्लाजा का लिंक मिला।
यह भी पढ़ें: टूटे नूडल्स से बनाया भुजिया: 32 हजार किलो स्टॉक जब्त, एफएसएसएआई ने उत्पादन भी रुकवाया; कहां का है मामला?
करोड़ों की फर्जी रसीदों का रिकॉर्ड मिला
जांच एजेंसी को डिजिटल रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की कथित गैरकानूनी टोल रसीदें मिली हैं। ईडी अब एनएचएआई के बिचौलियों और टोल वसूली करने वाली कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में टोल प्लाजा और उनसे जुड़े लोगों-कंपनियों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है।
छापे में 1.03 करोड़ रुपये नकद मिले
ईडी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में 14 जगह तलाशी ली। कार्रवाई में करीब 1.03 करोड़ रुपये नकद, खाते की किताबें, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इसके अलावा आठ बैंक लॉकर फ्रीज किए गए हैं।