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पात्रा चॉल घोटाला: मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई अब तक? बॉम्बे हाईकोर्ट का ईडी से सवाल

Sat, 18 Feb 2023 06:04 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, मुंबई

सार

पात्रा चॉल घोटाला में शनिवार को ईडी की याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस एन आर बोरकर ने विशेष  सुनवाई की। न्यायाधीश ने पूछा कि केंद्रीय एजेंसी ने हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) के प्रमोटर सारंग और राकेश वधावन को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? जिन्हें मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
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विस्तार
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उद्धव गुट के नेता संजय राउत को दी गई जमानत को रद्द करने के लिए याचिका लेकर आए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की स्थिति तब असहज हो गई जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक कठिन सवाल पूछ दिया। दरअसल, हाईकोर्ट ने ईडी से पूछा कि वह संजय राउत की जमानत रद्द करने की मांग तो कर रही है लेकिन मुख्य आरोपी को कभी गिरफ्तार क्यों नहीं किया?  

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दरअसल, शनिवार को ईडी की याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस एन आर बोरकर ने एक बार फिर से बैठक की। न्यायाधीश ने पूछा कि केंद्रीय एजेंसी ने हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) के प्रमोटर सारंग और राकेश वधावन को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? जिन्हें मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है।

ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने तर्क दिया कि विशेष अदालत ने जमानत देते समय अप्रासंगिक सामग्री पर विचार किया। न्यायाधीश ने अधिकार क्षेत्र को पार कर लिया है और विधेय अपराध के खिलाफ एक निष्कर्ष निकाला है। कुछ टिप्पणियां हैं जिनकी आवश्यकता नहीं थी लेकिन उस समय इसका ध्यान नहीं रखा गया। ये टिप्पणियां अनावश्यक थीं।  एएसजी ने आगे कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) बनाया गया था। सिंह ने कहा मनी लॉन्ड्रिंग हत्या के आरोप से ज्यादा गंभीर है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता है।
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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह जब सारंग और राकेश वधावन के खिलाफ आरोपों को पढ़ रहे थे, तो अदालत ने पूछा कि क्या ईडी ने मौजूदा मामले में दोनों को गिरफ्तार किया है। सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, लेकिन ईडी ने उनके बयान दर्ज किए। अदालत ने कहा वे मुख्य आरोपी हैं... उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। अगर उन्हें अनुसूचित अपराध में जमानत पर रिहा किया जाता है, तो क्या होता है? सामान्य आरोप हैं।  पीठ ने सिंह से उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के पिछले फैसलों को दिखाने को भी कहा जहां जमानत इस आधार पर रद्द कर दी गई थी कि निचली अदालत का आदेश विकृत था।

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