प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रांची जोनल कार्यालय ने गुरुवार को एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा के खिलाफ अपनी तीसरी पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत झारखंड में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और टेंडर से जुड़े भ्रष्टाचार के रैकेट की चल रही जांच का हिस्सा है। इसके चलते ही तत्कालीन राज्य मंत्री आलमगीर आलम की गिरफ्तारी हुई थी। ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), जमशेदपुर द्वारा दर्ज 2019 की एफआईआर के आधार पर अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की, जिसमें सुरेश प्रसाद वर्मा को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। एसीबी द्वारा बाद की तलाशी में एक मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम से जुड़ी संपत्ति से 2.67 करोड़ रुपये की अस्पष्टीकृत नकदी जब्त की गई थी।
ईडी की जांच में एक गहरी साजिश का पता चला है, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों को कथित तौर पर सरकारी टेंडरों पर लगभग 3% कमीशन मिलता था। जांच में पाया गया कि इस कमीशन का एक बड़ा हिस्सा तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की ओर से एकत्र किया गया था, जिसे कथित तौर पर उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से प्रबंधित किया जाता था। इस नेटवर्क का पता व्यापक जांच के बाद चला, जिसमें मंत्री के सहयोगियों से जुड़े परिसरों से 35 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की गई। जांच में दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट और एंट्री ऑपरेटरों से जुड़े एक परिष्कृत मनी लॉन्ड्रिंग गठजोड़ की भी पहचान हुई है, जो शेल कंपनियों के माध्यम से अवैध नकदी को इधर-उधर कर रहे थे।
ईडी ने पहले आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था और उसके, वरिष्ठ अधिकारियों और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इस नवीनतम शिकायत में सुरेश प्रसाद वर्मा पर अपराध की आय के अधिग्रहण में उनकी भूमिका और बड़े रैकेट से जुड़ी अवैध नकदी को छिपाने में जानबूझकर सहायता करने का औपचारिक आरोप लगाया गया है। ईडी ने अभी तक 14 आरोपियों के खिलाफ चार अभियोजन शिकायतें, 3 अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए हैं। इसके तहत 44 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है। लगभग 38 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई है। 1.65 करोड़ रुपये के आभूषण, आठ लग्जरी वाहन जब्त किए गए हैं। इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।