ED: पहले से बिक चुकी संपत्तियों को गिरवी रख दो बार बैंक से लिया लोन, 60 दिन से 5 सितारा होटल में छिपा आरोपी काबू
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई जोनल कार्यालय ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, जो सरकारी बैंकों के साथ फ्रॉड करता था। पहले से बिक चुकी संपत्तियों को गिरवी रखकर आरोपी अमित अशोक थेपड़े ने केनरा बैंक से दो बार लोन ले लिया। इसके लिए उसने बैंक में भी सेटिंग कर रखी थी। कुछ जगहों पर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। ईडी, मुख्य आरोपी थेपड़े की लंबे समय से तलाश कर रही थी। खुफिया जानकारी के आधार पर, ईडी अधिकारियों ने आरोपी को दक्षिण मुंबई के एक प्रमुख पांच सितारा होटल से गिरफ्तार कर लिया। वह आरोपी, उस होटल में पिछले दो महीनों से रह रहा था।
अमित अशोक थेपड़े को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही एक जांच के सिलसिले में रविवार को गिरफ्तार किया गया है। इस मामला, केनरा बैंक से जुड़े 117.06 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी से संबंधित है। आरोपी, थेपड़े काफी समय से ईडी के अधिकारियों से बच रहा था। जांच एजेंसी ने एक खुफिया इनपुट के आधार पर होटल परिसर में रेड की थी। आरोपी के 50 से अधिक बैंकों में खाते थे। ईडी ने अब उन सभी खातों को फ्रीज कर दिया है। 9.5 लाख रुपये की नकदी और 2.33 करोड़ रुपये के बुलियन, सोने व हीरे के आभूषण, दो वाहन एवं डिजिटल उपकरणों को जब्त किया गया है। जांच एजेंसी द्वारा जब्त की गई नकदी, बुलियन, आभूषण एवं डिजिटल उपकरण, आदि वित्तीय लेनदेन के महत्वपूर्ण सबूत होने का संदेह है।
ईडी ने सीबीआई और एसीबी, पुणे द्वारा गैलेक्सी कंस्ट्रक्शन्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (जीसीसीपीएल) और मिट्सम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड (एमईपीएल) के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। अमित थेपड़े के स्वामित्व और नियंत्रण वाली दोनों कंपनियों ने विभिन्न अचल संपत्तियों को गिरवी रखकर केनरा बैंक से ऋण सुविधाएं प्राप्त की थीं। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने पहले से बिक चुकी संपत्तियों को गिरवी रखकर या उन्हीं संपत्तियों को दो बार गिरवी रखकर बैंक को धोखा देने की साजिश रची। इसके बाद कंपनियों को ऋण प्राप्त हुआ। निजी उपयोग के लिए उस धन की हेराफेरी की गई।
ईडी की आगे की जांच से पता चला है कि अमित थेपड़े ने आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त अवैध धन को परतों में बांटने और एकीकृत करने के लिए एक जटिल वित्तीय नेटवर्क बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसकी गिरफ्तारी व्यापक निगरानी और फोरेंसिक वित्तीय विश्लेषण के बाद हुई, जिसमें कई ऐसे लेन-देन सामने आए, जिनका उद्देश्य अपराध की आय के वास्तविक स्रोत को छिपाना था। ईडी के मुताबिक, अपराध की आय को वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस केस में आगे की जांच जारी है।