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ईडी: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति अटैच, आजम खां ने 45 प्लॉटों पर किया अवैध कब्जा

Wed, 28 Oct 2026 07:14 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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आजम खां - फोटो : एएनआई
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है। कुर्क की गई संपत्ति की कीमत 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इसका मौजूदा बाज़ार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, मोहम्मद आजम खां (उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री) और अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में की गई है। रामपुर के गाँव सिंघानखेड़ा (जौहर नगर) में स्थित यह यूनिवर्सिटी कैंपस 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' के पास है। इस ट्रस्ट की स्थापना मोहम्मद आज़म खान ने की थी और वही इसे नियंत्रित करते हैं। वे इस यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं। 
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गृह मंत्रालय ने लिया जमीन का कब्जा वापस 
ईडी ने यह जांच रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में आईपीसी की धारा 384 और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा किया गया था। इसके अलावा, रामपुर ज़िला प्रशासन की जाँच रिपोर्ट के अनुसार, गाँव सिंघानखेड़ा में 'एनिमी प्रॉपर्टी' (शत्रु संपत्ति) के 45 प्लॉट (लगभग 34 एकड़) पर भी मोहम्मद आज़म खान ने यूनिवर्सिटी के लिए अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया था। यह कब्ज़ा तब किया गया, जब कस्टोडियन द्वारा इस ज़मीन का लीज़ एग्रीमेंट (पट्टा) पहले ही रद्द किया जा चुका था। अब, रामपुर ज़िला प्रशासन के ज़रिए 'कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी' (गृह मंत्रालय) ने इस ज़मीन का कब्ज़ा वापस ले लिया है।
 
यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में सरकारी काम 
जांच के दौरान, ईडी ने पाया कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित फंड को यूनिवर्सिटी की ओर मोड़ दिया गया था। सरकारी काम यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में कराए गए और जिन ठेकेदारों को सरकारी ठेके मिले थे, उनसे प्राप्त फंड को दान के रूप में वापस ट्रस्ट को भेज दिया गया। ईडी ने यह जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की है। इसके आधार पर, रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में मोहम्मद आज़म खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ केस संख्या 0224/2026 (दिनांक 13.10.2026) दर्ज किया गया। यह मामला बीएनएस, 2023 की धाराओं 61, 316(5) और 318(4), तथा 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' की धाराओं 7 और 13 के तहत दर्ज किया गया है।
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कई परिवारों के घरों को बुलडोजर से ढहा दिया 
ईडी ने रामपुर पुलिस द्वारा मोहम्मद आज़म खान और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई 28 अन्य एफआईआर की भी जांच शुरू की है। इनमें से ज़्यादातर मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इन एफआईआर और चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि 2016 में, रामपुर शहर में कई परिवारों के घरों को बुलडोज़र से ढहा दिया गया था। इनमें से कई परिवार वक्फ संपत्ति में किराएदार थे। आरोप है कि उस समय के सर्कल ऑफिसर और अन्य लोगों के नेतृत्व में एक भीड़ ने मोहम्मद आज़म खान के निर्देश पर इन घरों को तोड़ा था। 

नकदी, गहने व मवेशी लूट लिए गए 
वहां रहने वालों के साथ मारपीट की गई, उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी गई, और उनसे नकदी, गहने व मवेशी लूट लिए गए। तोड़े गए घरों का मलबा यूनिवर्सिटी परिसर में ले जाया गया। एफआईआर और चार्जशीट में यह भी आरोप है कि रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी को यूनिवर्सिटी परिसर में भेज दिया गया था। जांच से पता चला है कि मुख्य रूप से रामपुर के रहने वाले ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों के लिए मिले फंड और निर्माण सामग्री को विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगा दिया। ऐसी ही एक कंपनी के प्रबंध निदेशक, जिसे पीडब्लूडी से लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे, ने स्वीकार किया कि ठेके की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया। 

आयकर विभाग ने किया ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द 
एक अन्य फर्म के साझेदारों ने माना कि वे मोहम्मद आजम खान के प्रभाव में काम करते थे और उनकी फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा दिया था। इसके अलावा, आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत इस ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय के निजी परिसर में एमएलए /एमएलसी स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य कराए गए। ये काम उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किए गए थे, जिसके अध्यक्ष उस समय मोहम्मद आजम खान थे। इसके अलावा, राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके ट्रस्ट को मेरठ की दो शैक्षणिक संस्थाओं से 6.24 करोड़ रुपये का चंदा भी मिला था। यह भी पता चला है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के निजी परिसर में एक पंडाल, ओबीसी लड़कों के छात्रावास और एक अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। 2015 के सरकारी आदेश में, जिसके तहत पंडाल के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, यह शर्त रखी गई थी कि इसका स्वामित्व उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। इसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। इसे राज्य सरकार के उपयोग के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। 

सार्वजनिक संपत्ति को विश्वविद्यालय की संपत्ति में बदला 
हालाँकि, 2016 के एक बाद के आदेश में इन शर्तों को बदल दिया गया। पंडाल का स्वामित्व जौहर विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया, और राज्य सरकार द्वारा इसके उपयोग की शर्त को हटा दिया गया। इस तरह, राज्य के फंड से बनी एक सार्वजनिक संपत्ति को विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति में बदल दिया गया। 2015 और 2016 में, जब ये आदेश जारी किए गए थे, तब मोहम्मद आज़म खान उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनके पास शहरी विकास और उत्तर प्रदेश जल निगम के विभाग थे, और परिसर में इन निर्माण कार्यों को अंजाम देने वाला उत्तर प्रदेश जल निगम, उन्हीं के शहरी विकास विभाग के अंतर्गत आता था।

परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये 
जिला मूल्यांकन अधिकारी (जो एक स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता हैं) ने 10.11.2023 की अपनी रिपोर्ट में, विश्वविद्यालय परिसर में बनी 59 इमारतों की निर्माण लागत का आकलन 494.46 करोड़ रुपये किया है। 114 बिक्री विलेखों (सेल डीड) के माध्यम से अधिग्रहित की गई विश्वविद्यालय की भूमि का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये आंका गया है। इस प्रकार, परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये (494.46 करोड़ रुपये + 4.63 करोड़ रुपये) बैठती है। इसके विपरीत, ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया है। इसके अलावा, 78.32 करोड़ रुपये की इस राशि में से 12.29 करोड़ रुपये के चंदे फर्जी पाए गए हैं। इस तरह, विश्वविद्यालय के लिए इमारतों के निर्माण और भूमि अधिग्रहण पर ट्रस्ट द्वारा किया गया वास्तविक खर्च केवल 66.03 करोड़ रुपये ही रह जाता है। 

426.46 करोड़ के स्रोत को साबित नहीं कर सके 
कुल मिलाकर, परिसर की लागत में से केवल 72.63 करोड़ रुपये ही वैध स्रोतों से साबित हो पाए हैं। जांच से पता चला है कि बाकी बची 426.46 करोड़ रुपये (499.09 करोड़ रुपये - 72.63 करोड़ रुपये) की राशि इस मामले में 'अपराध से प्राप्त आय' (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) है, जिसे गलत तरीकों से जुटाया गया था। ट्रस्ट के पदाधिकारी 426.46 करोड़ रुपये की इस राशि के स्रोत को साबित नहीं कर सके, जो कि इस मामले में अपराध से प्राप्त आय है। इसलिए, मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर की 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि और इमारतों को - जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये है - पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया गया है। 
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