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ED: 30 करोड़ रुपये की सरकारी मदद हड़पने के लिए कर दिया 'विवाह' घोटाला, क्या है 5923 'संदिग्ध शादियों' का राज?

Tue, 07 Oct 2025 08:52 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ईडी - फोटो : ANI
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सरकारी प्रावधानों के तहत निर्माण श्रमिकों के परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित, धनराशि आवंटित की जाती है। मकसद, असंपन्न लोगों की आर्थिक मदद करना होता है। विवाह के मौके पर यह राशि प्रदान की जाती है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के मन में लालच आ गया। उन्होंने 30 करोड़ रुपये की सरकारी मदद हड़पने के लिए प्लान तैयार कर दिया। यानी 'विवाह' घोटाला कर दिया। लगभग 5923 विवाह, 'संदिग्ध शादियों' की लिस्ट में शामिल हो गए। जो सरकारी मदद, इन जरुरतमंद परिवारों को मिलनी थी, वह सीईओ और कुछ कर्मचारियों के पास चली गई। सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर 'विवाह' के आंकड़ों को बदल दिया गया। यह 'विवाह' घोटाला, मध्यप्रदेश के कई जिलों में हुआ है। 
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ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा, भोपाल द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत जनपद पंचायत सिरोंज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। मध्य प्रदेश सरकार की विवाह सहायता योजना के तहत 2019 से नवंबर 2021 तक की अवधि के लिए 5923 संदिग्ध विवाह देखने को मिले। इन शादियों के नाम पर जरुरतमंद परिवारों को 30.18 करोड़ (लगभग) की राशि दी जानी थी। 

ईडी की जांच से पता चला है कि शोभित त्रिपाठी ने डेटा एंट्री ऑपरेटरों योगेंद्र शर्मा और हेमंत साहू के साथ मिलीभगत करके, निर्माण श्रमिकों के परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए मूल रूप से आवंटित धनराशि को गबन करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया था। उन्होंने जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज तैयार किए। सरकारी पोर्टल पर धोखाधड़ी वाली जानकारी अपलोड कर दी। इन दस्तावेजों का धोखाधड़ी और गैरकानूनी तरीके से उपयोग करके उन्होंने सरकारी खजाने से अपात्र आवेदकों के बैंक खातों में धनराशि स्थानांतरित की। बाद में एटीएम के जरिये उस राशि को कई किश्तों में निकाल लिया। 
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चूंकि ये सब एक प्लानिंग के तहत हो रहा था, इसलिए निकाली गई राशि को शोभित त्रिपाठी और उनके परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित व्यक्तियों/संस्थाओं के बैंक खातों में जमा कर दिया गया। ईडी की जांच से यह भी पता चला है कि शोभित त्रिपाठी ने अपने रिश्तेदारों और उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बैंक खातों का इस्तेमाल, अपराध की आय को बेदाग दिखाने के लिए किया था। आरोपियों ने इस तरह जमा की गई राशि का उपयोग या तो विभिन्न भुगतानों के लिए किया या फिर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए निवेश कर दिया। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत भोपाल, विदिशा, कटनी, छतरपुर जिलों में तीन अक्तूबर को 7 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस मामले के तार जनपद पंचायत सिरोंज के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी और अन्य लोगों से जुड़े थे। तलाशी में संपत्ति के कागजात, डिजिटल उपकरणों सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। शोभित त्रिपाठी और अन्य के 21.7 लाख रुपये के बैंक खातों और म्यूचुअल फंड को फ्रीज कर दिया गया है। 
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ED: 500 किलो ड्रग्स... पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते गुजरात टू पंजाब, मकसद लश्कर को पहुंचाना था पैसा 
 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2020 के अंतरराष्ट्रीय नार्को-आतंकवादी नेटवर्क मामले में आठ और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। यह मामला पाकिस्तान से समुद्री रास्ते के द्वारा गुजरात में और उसके बाद पंजाब में पाँच सौ किलो ड्रग्स पहुंचाने से जुड़ा है। इस ड्रग्स की तस्करी का मकसद, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) आतंकी संगठन को वित्तीय मदद पहुँचाना था। सलाया ड्रग्स मामले में दायर 8वें पूरक आरोपपत्र (RC-26/2020/NIA/DLI) में, एनआईए ने इटली निवासी सिमरनजीत सिंह संधू, ऑस्ट्रेलिया निवासी तनवीर बेदी और भारत निवासी अंकुश कपूर द्वारा रची गई नार्को-आतंकवादी साजिश को निर्णायक रूप से स्थापित कर दिया है।

यह आरोपपत्र व्यापक डिजिटल, तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अहमदाबाद स्थित एनआईए की विशेष अदालत में एनडीपीएस अधिनियम और यूए (पी) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत दायर किया गया है। सिमरनजीत सिंह, ऑस्ट्रेलिया निवासी तनवीर सिंह बेदी और अंकुश कपूर के अलावा आरोपपत्र में नामित अन्य आरोपी व्यक्ति पाकिस्तानी नागरिक तारिक उर्फ भाईजान, गगनदीप सिंह अरोड़ा और तीन अन्य आरोपी व्यक्ति- तमन्ना गुप्ता, सुखबीर सिंह उर्फ हैप्पी और अनवर मसीह हैं।

यह मामला पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से गुजरात में 500 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी और फिर उसे पंजाब पहुँचाने से संबंधित है। मादक पदार्थों की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया गया था। एनआईए की जाँच से पता चला है कि मादक पदार्थ-आतंकवाद की यह साजिश गुजरात, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ सहित कई भारतीय राज्यों में फैली हुई थी। इसकी जड़ें इटली, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, ईरान और थाईलैंड सहित कई देशों तक मिली हैं। 

जाँच के अनुसार, अंकुश कपूर भारत में एक प्रमुख मास्टरमाइंड था।वह पंजाब में नार्को-टेरर सिंडिकेट की जमीनी गतिविधियों के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार था। साथ ही वह प्रतिबंधित पदार्थों की रसद, भंडारण और स्थानीय वितरण का समन्वय करता था। भारत और विदेश में स्थित अभियुक्तों को सक्रिय रूप से धन मुहैया कराता था। सिमरनजीत, नार्को टेरर सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था। वहाँ अवैध नशीले पदार्थों के अवैध परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए ज़िम्मेदार था।जांच में यह भी पता चला कि तारिक उर्फ भाईजान ने समुद्री मार्ग से पाकिस्तान से भारत में हेरोइन की तस्करी के समन्वय और इसके परिवहन की निगरानी का काम देखता था।उसने पंजाब में इसके वितरण में सहायता तथा लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को वित्तपोषित करने के लिए आय को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

ऑस्ट्रेलिया स्थित वांछित अभियुक्त तनवीर बेदी, भारत में लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाला चैनलों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी और उससे होने वाली आय के हस्तांतरण में सक्रिय रूप से शामिल था। अन्य अभियुक्तों तमन्ना, सुखबीर सिंह और अनवर मसीह पर आतंकी वित्तपोषण की साजिश में उनकी जानबूझकर की गई भूमिका के लिए आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, गगनदीप सिंह अरोड़ा, जो एक हवाला ऑपरेटर है और वर्तमान में फरार है, पर भारी मात्रा में धन शोधन और आतंकी गुर्गों को अवैध धन हस्तांतरण में मदद करने के आरोप में एनआईए द्वारा आरोप पत्र दायर किया गया है।

गुजरात एटीएस ने मूल आरोपपत्र दाखिल किया था और एनआईए ने इससे पहले सात पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। इस मामले में अब तक कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि आठ आरोपी फरार हैं। एनआईए मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के बीच गठजोड़ को खत्म करने के अपने प्रयासों के तहत फरार आरोपियों का पता लगाने और सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए अपनी जाँच जारी रखे हुए है।
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