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ED: रेलवे के माल ढुलाई बुकिंग रिकॉर्ड में हेराफेरी, जुटाई ₹16.15 करोड़ की आपराधिक आय, खजाने को भारी नुकसान

Wed, 07 Jan 2026 06:06 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयपुर में रेलवे माल ढुलाई बुकिंग रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उच्च माल भाड़े वाली वस्तुओं को कम भाड़े की श्रेणी में दिखाया गया। इससे आरोपियों ने 16.15 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। ईडी ने कार्रवाई करते हुए 2.67 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की।
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ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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जयपुर में रेलवे के माल ढुलाई बुकिंग रिकॉर्ड में हेराफेरी कर आरोपियों ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा दिया। ये खेल लंबे समय तक चलता रहा। बुकिंग रिकॉर्ड में संगमरमर पाउडर, अपशिष्ट संगमरमर पाउडर और डोलोमाइट जैसी उच्च माल ढुलाई वाली वस्तुओं को फिटकरी पाउडर और पुट्टी जैसी कम माल ढुलाई वाली वस्तुओं के रूप में घोषित किया। नतीजा आरोपियों ने 16.15 करोड़ रुपये की आपराधिक आय जुटा ली। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने अब इस केस में कार्रवाई करते हुए 2.67 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।  

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यह मामला मेसर्स विनायक लॉजिस्टिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स विनायक लॉजिस्टिक्स और उनके मालिक/निदेशक प्रवेश काबरा द्वारा भारतीय रेलवे के साथ जानबूझकर, सुनियोजित और बड़े पैमाने पर की गई धोखाधड़ी से संबंधित है। यह अटैचमेंट सीबीआई, एसपीई, जयपुर द्वारा दर्ज की गई तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की गई गहन जांच और उसके बाद चार्जशीट दाखिल करने के बाद की गई है। 

जांच में एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें आरोपी संस्थाओं ने जानबूझकर संगमरमर पाउडर, अपशिष्ट संगमरमर पाउडर और डोलोमाइट जैसी उच्च माल ढुलाई वाली वस्तुओं को फिटकरी पाउडर और पुट्टी जैसी कम माल ढुलाई वाली वस्तुओं के रूप में गलत तरीके से घोषित किया। इसका एकमात्र उद्देश्य माल ढुलाई देयता को गैरकानूनी रूप से कम करना था। सुनियोजित हेरफेर केपरिणामस्वरूप रेलवे माल ढुलाई शुल्क और जीएसटी की भारी मात्रा में चोरी हुई, जिससे भारतीय रेलवे और सरकारी खजाने को काफी और गैरकानूनी नुकसान हुआ।
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ईडी की जांच में यह स्थापित हुआ कि आरोपी संस्थाओं ने लंबे समय तक नियमित रूप से और धोखाधड़ी से माल ढुलाई बुकिंग रिकॉर्ड में हेराफेरी की, जिससे उन्होंने अवैध रूप से रियायती माल ढुलाई दरों का लाभ उठाया। इस धोखाधड़ी के माध्यम से उपर्युक्त संस्थाओं द्वारा अर्जित अवैध बचत, यानी अपराध से प्राप्त धनराशि (पीओसी), 16.15 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस अवैध लाभ को बाद में जानबूझकर प्रवेश काबरा के व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया, जो अपराध से प्राप्त लाभ को छिपाने और उसका आनंद लेने के स्पष्ट इरादे को दर्शाता है।

पीएमएलए के तहत आगे की जांच से निर्णायक रूप से पता चला कि पीओसी का उपयोग उच्च मूल्य की अचल संपत्तियों के अधिग्रहण और व्यक्तिगत और व्यावसायिक खर्चों के वित्तपोषण के लिए किया गया था। अस्थायी रूप से जब्त की गई संपत्तियों में हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत और एक अन्य व्यावसायिक संपत्ति शामिल है, जिनका संयुक्त मूल्य 2.67 करोड़ रुपये है। वित्तीय जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि जब्त की गई संपत्तियों की पूरी खरीद राशि, काबरा के निजी बैंक खाते से चुकाई गई थी, जो मुख्य रूप से अनुसूचित अपराधों से अर्जित धन के लिए एक माध्यम और भंडार के रूप में कार्य करता था।

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यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय के धन की पहचान करने, उसका पता लगाने और उसे जब्त करने तथा यह सुनिश्चित करने के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करती है कि आर्थिक अपराधी अवैध साधनों से अर्जित संपत्तियों को अपने पास न रख सकें। किसी तरह से उनका लाभ न उठा सकें। अवैध आय के शुद्धिकरण में शामिल अतिरिक्त व्यक्तियों और संपत्तियों की पहचान के लिए जांच जारी है।

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महादेव एप मामला: ईडी ने मुख्य प्रवर्तक सौरभ अन्य की 92 करोड़ की नई संपत्तियां कीं अटैच

प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्रकार समेत विभिन्न आरोपियों की करीब 92 करोड़ रुपये की नई संपत्तियां अटैच की हैं। इस एप में छत्तीसगढ़ के कई बड़े राजनेता और नौकरशाह शामिल हैं। परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- जीजेडसीओ के पास मौजूद 74.28 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि को अटैच करने के लिए ईडी ने पीएमएलए के तहत एक अंतरिम आदेश जारी किया था।

ईडी ने एक बयान में कहा, ये संस्थाएं सौरभ चंद्रकार, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया से संबंधित हैं। महादेव एप का प्रचार चंद्रकार और उनके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था, जो दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनकी अंतिम ज्ञात लोकेशन यूएई में थी और भारत उनके प्रत्यर्पण के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा, हरि शंकर तिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली ।

गुप्ता स्काईएक्सचेंजडॉटकॉम का मालिक और दुबई स्थित एक हवाला ऑपरेटर है। ईडी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) एप और स्काईएक्सचेंजडॉटकॉम ने अपराध से भारी मात्रा में धन अर्जित किया, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर वैध बनाया गया। चंद्रकर और अन्य लोगों ने महादेव ऐप के माध्यम से जनता को धोखा दिया। यह एप कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों या मोबाइल एप्लिकेशन को ग्राहकों को आकर्षित करने और इन अवैध सट्टेबाजी के खेलों और वेबसाइटों के वित्तीय संचालन को संभालने के लिए बनाया गया था। ईडी ने कहा है कि इस प्रक्रिया में, वेबसाइटों को इस तरह से हेरफेर किया गया था कि अंततः सभी ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा।
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