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ED: भूमि हड़पने की साजिश, जाली वंशावली रिकॉर्ड, फर्जी बिक्री विलेख और नकली वसीयत; 212 करोड़ की संपत्ति कुर्क

Wed, 30 Jul 2025 02:12 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने रोहन हरमलकर और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ गोवा पुलिस द्वारा दर्ज दो प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की थी। इनमें जालसाजी, प्रतिरूपण और उत्तरी गोवा में धोखाधड़ी से भूमि भूखंड हासिल करने के लिए नकली दस्तावेजों का उपयोग शामिल हैं।
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ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 जुलाई को गोवा राज्य के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर स्थित कई अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इन अचल संपत्तियों का कुल मूल्य 212.85 करोड़ रुपये है। उक्त अस्थायी कुर्की आदेश, रोहन हरमलकर और उसके साथियों के नेतृत्व वाले एक संगठित आपराधिक गिरोह द्वारा भूमि हड़पने और जालसाजी की एक व्यापक साजिश की चल रही जांच के संबंध में जारी किया गया है।

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ईडी ने रोहन हरमलकर और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ गोवा पुलिस द्वारा दर्ज दो प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की थी। इनमें जालसाजी, प्रतिरूपण और उत्तरी गोवा में धोखाधड़ी से भूमि भूखंड हासिल करने के लिए नकली दस्तावेजों का उपयोग शामिल हैं।

ईडी की जांच से पता चला कि रोहन हरमलकर ने अलकांत्रो डिसूजा और अन्य के साथ सक्रिय साजिश में, अंजुना, रेवोरा, नाडोरा, कैमुरलिम, पारा और बारदेज़ तालुका और मापुसा शहर, गोवा के भीतर आने वाले अन्य आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई उच्च मूल्य की संपत्तियों के गबन के लिए एक सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध आपराधिक उद्यम का संचालन किया। पीएमएलए जांच में आरोपियों द्वारा जाली वंशावली रिकॉर्ड, फर्जी बिक्री विलेख, नकली वसीयत, हेरफेर की गई सूची कार्यवाही और अन्य धोखाधड़ी दस्तावेजों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ, ताकि वे मूल्यवान अचल संपत्तियों पर झूठा दावा कर सकें। उन्हें वैध रूप से रखी गई संपत्ति के रूप में छिपा सकें। इसका मकसद, पीएमएलए की धारा 2 (1) (यू) के तहत परिभाषित पर्याप्त अपराध आय (पीओसी) उत्पन्न करना था। 
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पीओसी का हिस्सा सीधे रोहन हरमलकर, अलकांत्रो डिसूजा और अन्य लोगों द्वारा प्राप्त किया गया। बाद में उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के खातों के माध्यम से भेजा गया। इस प्रकार अर्जित अवैध लाभ प्रमुख षड्यंत्रकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के माध्यम से भेजा गया, जिससे दागी धन को बेदाग दिखाने के लिए उसे स्तरित और एकीकृत किया गया। जांच एजेंसी द्वारा 212.85 करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान की गई है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत उसे अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। शेष पीओसी का पता लगाने और उसे कुर्क करने के प्रयास जारी हैं, जो काफी अधिक हो सकते हैं। इसके माध्यम से धन शोधन अभियान की व्यापकता का पूरी तरह से पता लगाया जा सकता है। मुख्य आरोपी, रोहन हरमलकर को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। केस की आगे की जांच जारी है।

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