प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मासिक भुगतान मामले के सिलसिले में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन को समन जारी किया है। पिनाराई को अगले शुक्रवार पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया है। माना जा रहा है कि पेश होने के बारे में फैसला बाद में लिया जाएगा, क्योंकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। साथ ही, विधानसभा सत्र चलने का हवाला देते हुए ईडी को पेश होने में आ रही कठिनाई के बारे में सूचित करने की भी योजना है।
ईडी ने क्या बताया?
ईडीने बताया कि ये समन 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत जारी किए गए हैं। इस मामले में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय एजेंसी ने भी एक केस दर्ज किया है।
अधिकारियों के अनुसार, 81 वर्षीय विजयन को 23 अक्तूबर को कोच्चि स्थित ईडी कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। केरल विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) ने हाल ही में कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले के संबंध में विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं।
केरल हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
9 अक्तूबर को केरल हाईकोर्ट ने वीएसीबी को निर्देश दिया था कि वह ईडी की ओर से राज्य पुलिस को सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करे।केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत अपनी जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर केस दर्ज करने की मांग की थी।
ईडी का आरोप है कि सीएमआरएल ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं की आड़ में, विजयन की बेटी वीणा की कंपनी 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' (जो अब बंद हो चुकी है) को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया।
पूर्व सीएम ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख
वहीं, इस मामले में अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। केरल हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और उनका परिवार शुक्रवार को शीर्ष अदालत का रुख करने जा रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई का असर न सिर्फ दिग्गज सीपीआई (एम) नेता पर, बल्कि अपनी सबसे बड़ी चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही पार्टी पर भी पड़ेगा।
इस बीच, सीपीआई (एम) नेतृत्व ने विजयन के पीछे एकजुटता दिखाई है और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से उनके इस्तीफे से इनकार कर दिया है। इस फैसले से राजनीतिक नैतिकता पर पार्टी के रुख पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वह खुद दूसरी पार्टियों के नेताओं से भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही की मांग करती रही है।
यह विवाद पूर्व सीपीआई (एम) महासचिव प्रकाश करात के एसएनसी-लवलिन मामले में विजयन के बचाव की याद दिलाता है। करात ने तब तर्क दिया था कि विजयन को पार्टी के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है क्योंकि तब उनके पास कोई सरकारी पद नहीं था।
यह कानूनी झटका ऐसे समय आया है, जब पार्टी की जिला समितियां अप्रैल 2026 में हुई चुनावी हार के कारणों की समीक्षा कर रही हैं। वाम मोर्चे की विधानसभा में सीटें 99 से घटकर 35 रह गईं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीतीं और भाजपा को 3 सीटें मिलीं।