पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद सियासी माहौल पूरी तरह बदल गया है। नई सरकार के गठन के साथ ही विवादित और आरोपों में घिरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शंतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि उन्होंने कई बार समन भेजे जाने के बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने शंतनु सिन्हा बिस्वास को पांच बार पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह एक भी बार एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। लगातार अनुपस्थित रहने के बाद एजेंसी को आशंका हुई कि वह देश से बाहर जाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसके चलते लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
देशभर के ट्रांजिट पॉइंट्स पर अलर्ट
यह लुकआउट नोटिस सभी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रमुख एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर भेजा गया है, ताकि उन्हें देश छोड़ने से रोका जा सके और जांच जारी रह सके। लुक आउट सर्कुलर (LOC) एक ऐसी चेतावनी होती है, जिसे जांच एजेंसियां जारी करती हैं ताकि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति देश छोड़कर भाग न सके। इसके तहत इमिग्रेशन विभाग को अलर्ट किया जाता है।
देश छोड़कर फरार होने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम पूर्व सरकार से करीबी संबंधों के चलते चर्चा में रहा है। हाल ही में उनके ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की थी और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। ऐसे में जांच एजेंसी को शक है कि वह देश छोड़कर फरार हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, ताकि देश के सभी एयरपोर्ट और सीमाओं पर उनकी निगरानी की जा सके।
ईडी का आरोप है कि शंतनु सिन्हा बिस्वास ने जांच के दौरान बार-बार भेजे गए समन का पालन नहीं किया। इससे पहले, चुनाव के दौरान ईडी ने उनके कोलकाता स्थित फर्न रोड आवास पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित जमीन कब्जा और जबरन वसूली के मामले से जुड़ी बताई गई थी, जिसमें ‘सोना पप्पू’ नामक व्यक्ति का भी नाम सामने आया था।
छापेमारी के बाद उनके दोनों पुत्रों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे भी एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। इसके अलावा, एक अन्य मामले में उन पर रेत तस्करी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। ईडी अधिकारियों के अनुसार, बार-बार समन के बावजूद पेश न होने के कारण अब लुकआउट नोटिस जारी करना जरूरी हो गया था, ताकि जांच प्रभावित न हो और संबंधित अधिकारी पूछताछ के लिए उपलब्ध रहें।
छापेमारी में मिले अहम सुराग
गौरतलब है कि 19 अप्रैल को ईडी की टीम ने शांतनु सिन्हा और सन एंटरप्राइज के प्रबंध निदेशक जॉय कामदार के ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इस दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे थे, जिनकी जांच जारी है। हालांकि छापेमारी के वक्त उनकी मौजूदगी को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आए थे। एक ओर कहा गया कि वह घर पर नहीं थे, वहीं उनके परिवार की तरफ से दावा किया गया कि वह घर में मौजूद थे और उनसे पूछताछ भी हुई थी।
सियासी करीबी और बढ़ती मुश्किलें
बताया जाता है कि शांतनु सिन्हा का संबंध तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व, खासकर ममता बनर्जी से करीबी रहा है। उन पर पहले भी कई तरह के आरोप लग चुके हैं। अब राज्य की सत्ता बदलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।