प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता जोनल कार्यालय ने मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सैयद जियाजुर रहमान को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत पांच जुलाई को गिरफ्तार किया है। इससे पहले आरोपी को न्यायालय द्वारा जारी प्रोडक्शन वारंट के आधार पर मुख्य न्यायाधीश, सिटी सेशंस कोर्ट, कोलकाता के समक्ष पेश किया गया था। आरोपी को 14 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। ईडी के मुताबिक, सैयद जियाजुर रहमान, मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से धोखाधड़ी की योजनाओं को अंजाम देने के मामले का मास्टरमाइंड है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपी, सैयद जियाजुर रहमान मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से लोगों के साथ धोखाधड़ी करता था। सैयद जियाजुर ने लोगों को उनके निवेश पर 2-3% के बीच सुनिश्चित रिटर्न का वादा किया था। उसकी इस बात ने कई निवेशकों को अपनी मेहनत की कमाई आरोपी व्यक्तियों को सौंपने के लिए लुभाया। जांच एजेंसी ने मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों/सहयोगियों के खिलाफ छापेमारी की है। विभिन्न बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। कई चल और अचल संपत्तियों की पहचान की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत दो आरोपियों मोहम्मद अनारुल इस्लाम और दिलीप कुमार मैती को गिरफ्तार किया है।
यह मामला आरोपी व्यक्तियों द्वारा विभिन्न कंपनियों और फर्मों के माध्यम से सार्वजनिक निवेश को धोखाधड़ी से जुटाने से संबंधित है, जो अत्यधिक दरों पर उच्च रिटर्न के झूठे वादों के आधार पर है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति, मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड की आड़ में अवैध कारोबार चलाते थे, जो शेयर ब्रोकिंग और अन्य निवेश गतिविधियों के लिए सेबी के साथ पंजीकृत कंपनी है।
हालांकि, उन्होंने जानबूझकर मेसर्स एलएफएस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के समान नामों वाली कई अन्य फर्मों को शुरू किया। निवेशकों को यह विश्वास दिलाने के लिए गुमराह किया गया कि वे सेबी-पंजीकृत कंपनी में निवेश कर रहे हैं, जबकि वास्तव में फंड को एलएफएस ब्रोकिंग और पीएमएस सर्विसेज और अन्य जैसी समान नाम वाली फर्मों में डायवर्ट किया गया था। जांच एजेंसी द्वारा अब तक, आरोपी व्यक्तियों द्वारा जुटाई गई कुल राशि लगभग 1500 करोड़ रुपये होने की पहचान की गई है।