केरल में सोना तस्करी मामले में मुख्यमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव एम शिवशंकर ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा, केरल सरकार और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के महावाणिज्य दूतावास के बीच संपर्क की इकलौती कड़ी मैं ही था।
उन्होंने कहा, मामले में एक आरोपी स्वप्ना सुरेश ने यूएई से त्रिवेंद्रम भेजी गई कुछ वस्तुओं की मंजूरी दिलाने के लिए मुझे फोन किया था, मगर मैंने मना कर दिया था। शिवशंकर का यह बयान ईडी ने विशेष कोर्ट में दाखिल कर दिया है।
शिवशंकर ने ईडी को बताया कि मैं स्वप्ना को 2017 से ही जानता था, जब वह महावाणिज्यदूतावास में सचिव थीं। उस वक्त उनसे मेरी यह पहली मुलाकात थी। बाद में मै उनका पारिवारिक मित्र बन गया। मैं उनके पति, बच्चों और माता-पिता को अच्छी तरह से जानता था।
उन्होंने कहा कि मैं इस मामले के एक और आरोपी सरिथ को स्पप्ना के सहकर्मी के रूप में जानता था, जिससे मैं स्वप्ना के ही घर पर कई बार मिला था। मैं खुद उसके घर दो बार जा चुका हूं। मैं एक और आरोपी संदीप से सिर्फ तीन से चार बार मिला था। सभी मुलाकातें स्वप्ना की मौजूदगी में हुई थीं।
शिवशंकर ने बताया कि एक जुलाई को स्वप्ना ने मुझे फोन कर बताया कि कुछ कूटनीतिक रूप से अहम वस्तुएं यूएई से त्रिवेंद्रम स्थित महावाणिज्य दूतावास को भेजी गई हैं, जो त्रिवेंद्रम स्थित एयर कार्गो कॉम्लेक्स में मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। स्वप्ना ने मुझसे आग्रह किया कि कॉम्लेक्स के सहायक आयुक्त को फोन करके मंजूरी दिला दें।
उन्होेंने मुझसे यह भी कहा कि कोचीन स्थित एयर कार्गो कॉम्लेक्स के सहायक आयुक्त के बॉस से बात की, मगर वह इस वक्त छुट्टी पर हैं। हालांकि, मैंने स्वप्ना के आग्रह को इनकार कर दिया था। उन्होंने मुझसे कहा कि महावाणिज्यदूतावास के राजनयिक सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं और अन्य सामान कूटनीतिक कार्गो में लाते रहे हैं और इन वस्तुओं को बीमापल्ली में बेचते हैं।