प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले में आरोपी 5,900 करोड़ रुपये के निवेश घोटाले में जांच अधिकारियों को धमका रहा था। आरोपी की पहचान कल्याण बनर्जी के नाम से हुई है। एजेंसी ने उसे धन शोधन कानून के तहत पकड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला नौहेरा शेख और उनके साथियों से जुड़ा है। इन पर आरोप है कि इन्होंने लोगों से सालाना 36 प्रतिशत से ज्यादा वापसी का वादा करके 5,978 करोड़ रुपये जुटाए। हालांकि, बाद में वे मूल रकम भी वापस नहीं कर पाए और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। इसके बाद ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 428 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों का पैसा लौटाने के लिए इन संपत्तियों को नीलाम करने की मंजूरी दी है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले नौहेरा शेख ने नीलामी रोकने के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट में भी अर्जी लगाई थी। कोर्ट ने न सिर्फ उसकी याचिका खारिज की, बल्कि उस पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने यह रकम प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया।
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नीलामी रोकने की कोशिश
ईडी ने दावा किया नौहेरा शेख ने कल्याण बनर्जी को काम पर रखा था। बनर्जी ने खुद को बड़े अफसरों और नेताओं का करीबी बताया। उसने ईडी अधिकारियों को मैसेज और कॉल करके नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए लुभाने की कोशिश की। जब अधिकारियों ने कानून का पालन करने की बात कही, तो उसने उन्हें धमकाना और दबाव डालना शुरू कर दिया। मामले में ईडी ने दस जनवरी को सिकंदराबाद में छापेमारी के बाद कल्याण बनर्जी को हिरासत में लिया। रविवार को उसे हैदराबाद की एक विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे 23 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
आरोपी ने कबूला जुर्म
जांच में पता चला कि बनर्जी सरकारी विभागों का सलाहकार होने का नाटक कर रहा था। उसके फोन में नौहेरा शेख के साथ बातचीत के कई आपत्तिजनक व्हाट्सएप मैसेज मिले हैं। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह शेख के कहने पर ही अधिकारियों पर दबाव बना रहा था और अपनी पहचान बदलकर बात कर रहा था।
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