भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके आईएएस अधिकारी और गुजरात के सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदातल में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ईडी ने अदालत को बताया कि आईएएस अधिकारी और गुजरात के सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल ने कथित तौर पर जमीन के इस्तेमाल में बदलाव (सीएलयू) के आवेदनों को मंजूरी देने के लिए 5 रुपये से 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक रिश्वत की दरें तय की थीं। पिछले दिनों ईडी ने राजेंद्रकुमार पटेल को गिरफ्तार किया था।
निजी सहायक को भेजी जाती थी रिश्वत की रकम
ईडी ने 2 जनवरी को अहमदाबाद में एक विशेष पीएमएलए अदालत में पेश की गई रिमांड आवेदन में बताया कि सीएलयू आवेदन को जल्दी आगे बढ़ाने के लिए स्पीड मनी के तौर पर सुनियोजित तरीके से रिश्वत मांगी और वसूली गई। इसे गुजरात में जिला कलेक्टर के कार्यालय से काम करने वाले बिचौलियों के एक नेटवर्क के जरिये भेजा गया। डिजिटल सबूतों के अनुसार, रिश्वत के संग्रह का एक खाता था और उसे समय-समय पर जिला कलेक्टर के निजी सहायक को भेजा जाता था।
हर किसी का तय था हिस्सा
कुल रिश्वत में से कथित तौर पर 50 प्रतिशत पटेल को मिला, 10 प्रतिशत एक बिचौलिए ने रखा और बाकी रकम कलेक्टर कार्यालय के दूसरे अधिकारियों में बांटी गई, जिसमें रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर, एक मामलतदार और एक क्लर्क शामिल थे। अदालत ने पटेल को 7 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। जांच में अब तक 800 से अधिक सीएलयू आवेदनों का पता चला है, जिनमें कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी। इससे 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई, जो अपराध की कुल कमाई का एक हिस्सा है।
ईडी ने कोर्ट में कहा कि 2015 बैच के आईएएस अधिकारी और तत्कालीन सुरेंद्रनगर कलेक्टर पटेल सीएलयू मंजूरी से जुड़े रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट में मुख्य लाभार्थी और अंतिम फैसला लेने वाले थे। इस मामले में ईडी की ओर से एक डिप्टी मामलतदार (राजस्व अधिकारी) चंद्रसिंह मोरी को उनके कार्यालय से गिरफ्तार किए जाने के एक हफ्ते पहले पटेल का बिना किसी पोस्टिंग के ट्रांसफर कर दिया गया था। जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद पटेल, मोरी और अन्य लोगों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू कर की थी।
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अधिकारों का किया गलत इस्तेमाल
ईडी के मुताबिक, सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स ऑर्डिनेंस, 1949 तथा गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड, 1879 के तहत सीएलयू मंजूरी देने का अंतिम अधिकार जिला कलेक्टर के पास होता है। इसी पद का इस्तेमाल कर पटेल ने आवेदनों की गति और नतीजों को प्रभावित किया। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित धन का स्रोत तो प्राथमिक तौर पर सामने आ गया है, लेकिन उसकी लेयरिंग, छिपाने और वैध रूप में दिखाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।
ईडी के मुताबिक, सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स ऑर्डिनेंस, 1949 तथा गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड, 1879 के तहत सीएलयू मंजूरी देने का अंतिम अधिकार जिला कलेक्टर के पास होता है। इसी पद का इस्तेमाल कर पटेल ने आवेदनों की गति और नतीजों को प्रभावित किया। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित धन का स्रोत तो प्राथमिक तौर पर सामने आ गया है, लेकिन उसकी लेयरिंग, छिपाने और वैध रूप में दिखाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।
पटेल के निजी सहायक जयराजसिंह जाला ने अपने बयान में कहा कि वह समय-समय पर रिश्वत वसूली का विवरण कलेक्टर को देता था और कुल रकम का 50 फीसदी हिस्सा पटेल को सौंपा जाता था। इससे पहले मोरी ने भी कहा था कि जाला उससे कलेक्टर का हिस्सा लेकर पटेल तक पहुंचाता था।मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों में व्हाट्सऐप चैट, पीडीएफ फाइलें और तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें रिश्वत के हिसाब और उसके ट्रांसफर का रिकॉर्ड मौजूद है। मोरी के फोन से मिली चैट के आधार पर ईडी का दावा है कि पूरा नेटवर्क कलेक्टर के निर्देशों पर संचालित हो रहा था।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि अहमदाबाद में खरीदा गया एक फ्लैट पटेल के नाम पर है, लेकिन उसका किराया उनकी मां के बैंक खाते में जाता था। एजेंसी का यह भी दावा है कि पटेल अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं देते थे, जिससे संदेह है कि घरेलू खर्च नकद और बेहिसाब पैसे से चलाए जा रहे थे।