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ED: ईडी ने 93 बैंक खातों और 3.44 करोड़ रुपये की जमा राशि को फ्रीज किया, ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ा है मामला

Fri, 28 Apr 2023 11:12 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

यह मामला हरीश उर्फ कमलेश जरीवाला और अन्य द्वारा "फर्जी और डमी" बैंक खातों के माध्यम से की गई कथित सट्टेबाजी गतिविधियों से संबंधित है। ईडी ने एक बयान में कहा कि CBTF247.com और T20 EXCHANGE.com नामक मोबाइल एप के जरिये सट्टा लगाया जा रहा था।
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ईडी (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुजरात में एक अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले से जुड़े धन शोधन (Money Laundering) मामले की जांच के तहत 93 बैंक खातों को सील कर दिया है और 3.44 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं। ईडी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

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केंद्रीय एजेंसी द्वारा गुरुवार को सूरत में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा में पांच खातों की तलाशी लेने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई। यह मामला हरीश उर्फ कमलेश जरीवाला और अन्य द्वारा "फर्जी और डमी" बैंक खातों के माध्यम से की गई कथित सट्टेबाजी गतिविधियों से संबंधित है। ईडी ने एक बयान में कहा कि CBTF247.com और T20 EXCHANGE.com नामक मोबाइल एप के जरिये सट्टा लगाया जा रहा था।

बैंक में तलाशी के दौरान पता चला कि मितालिया एंटरप्राइज, आरएम एंटरप्राइज, डीएम एंटरप्राइजेज, विश्वकर्मा ट्रेडर्स और एक्सबीटी लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के पांच खातों में 3.44 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। ईडी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के इन खातों को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत फ्रीज कर दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि इसके अलावा, 93 बैंक खातों, जिनमें ये पांच बैंक खाते भी शामिल हैं अपराध की आय के लेयरिंग या ट्रांसफर में शामिल हैं। इन बैंक खातों को डेबिट फ्रीज करने का आदेश दिया गया है।
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यह आरोप लगाया गया है कि जरीवाला ने ऋषिकेश अधिकार शिंदे और हुजेफा कौसर मसाकरवाला के साथ एक आपराधिक साजिश के तहत विभिन्न लोगों के पहचान दस्तावेज प्राप्त किए और उनके नाम पर फर्जी रेंट एग्रीमेंट तैयार किया। इसके बाद इससे मोबाइल फोन सिम कार्ड और डमी फर्मों के लिए लाइसेंस प्राप्त किए।

ईडी ने कहा कि अवैध सट्टेबाजी एप्स CBTF247.com और T20 EXCHANGE.com से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए लॉगिन आईडी/पासवर्ड और सिम कार्ड मसाकरवाला को बेचे गए थे और ये बैंक खाते "फर्जी संस्थाओं के लिए रूटिंग और लेयरिंग ऑफ मनी" के नाम से खोले गए थे। ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले का पता आरोपी के खिलाफ सूरत पुलिस की अपराध शाखा में दर्ज एक प्राथमिकी से चला था।

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