राज्य के कोयंबटूर और करूर जिलों में तीन अगस्त को बालाजी से जुड़े नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में चेन्नई के पुझल केंद्रीय कारागार में बंद हैं। बालाजी, एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार में बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य परिवहन विभाग में नौकरियों के बदले नकदी घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में 14 जून को गिरफ्तार किया था।
ईडी ने कहा कि उसने ताजा छापेमारी तब की गई जब उसे 'खुफिया जानकारी' मिली कि बालाजी के 'करीबी सहयोगी' एसटी सामीनाथन के पास अपराध से जुड़े दस्तावेज हैं और वह उन्हें छिपाने/स्थानांतरित करने का प्रयास कर रहा है। सामीनाथन के परिसरों पर छापा मारा गया और यह पाया गया कि उनकी भाभी शांति 'उनकी बेनामी के रूप में काम कर रही थीं और उन्हें दस्तावेजों और कीमती सामानों से भरे बैग ले जाते हुए देखा गया था'।
एजेंसी ने कहा कि उनकी टीमों ने शांति के परिसरों को कवर किया, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं थीं। ईडी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि बैग शिवा नाम के एक चालक को सौंप दिए गए थे। जब शिवा के घर की तलाशी ली गई तो वह वहां मौजूद नहीं था और शांति के घर की तलाशी के बारे में पता चलने के बाद उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। ईडी ने दावा किया, शिवा के आवास की तलाशी के दौरान 22 लाख रुपये नकद और 16.6 लाख रुपये का बेहिसाब कीमती सामान और 60 भूखंडों के अस्पष्ट संपत्ति दस्तावेज मिले।
एजेंसी ने कहा कि शांति एक गृहिणी है और उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है, उसने सहयोग नहीं किया और तलाशी की कार्यवाही में भाग नहीं लिया। ईडी ने कहा कि चालक शिवा ने अपने बयान में स्वीकार किया कि शांति ने उसे इस डर से बैग दिए थे कि आपत्तिजनक जानकारी मिल जाएगी। ईडी ने आरोप लगाया, ऐसा प्रतीत होता है कि जब्त की गई संपत्ति और नकदी सामीनाथन की है। संघीय जांच एजेंसी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि बालाजी उसे हिरासत में पूछताछ करने और सच सामने लाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से रोक रहे हैं।