ईडी ने यूनिटेक लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ चल रही जांच में विशेष अदालत के समक्ष दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (एसपीसी) दायर की है। निदेशायल ने आरोपी व्यक्तियों रमेश चंद्र और अन्य (मेसर्स शिवालिक वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स औरम एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स यूनिटेक बिल्ड टेक लिमिटेड, मेसर्स यूनिटेक गोल्फ रिसॉर्ट्स लिमिटेड और मेसर्स रैंचेरो सर्विसेज लिमिटेड सहित) के खिलाफ अपनी दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (एसपीसी) विशेष न्यायालय (पीएमएलए), के समक्ष 10 जुलाई को पेश की है। जांच में सामने आया है कि 29,800 से ज्यादा लोगों ने जीवन भर की बचत और मेहनत की कमाई, घर खरीदने में लगाई। इन लोगों ने यूनिटेक कंपनी में राशि जमा की थी। ईडी की जांच में पता चला है कि कंपनी ने घर बनाने की बजाए, दूसरे कामों में 7794.35 करोड़ रुपये लगा दिए। ऐसा कर घर खरीदारों को धोखा दिया गया।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड, उनके निदेशकों और अन्य के खिलाफ चल रही जांच के संबंध में दायर की है। ईडी ने सीबीआई और दिल्ली पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड, रमेश चंद्र, संजय चंद्र, प्रीति चंद्र, अजय चंद्र और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह शिकायत एक चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जाँच का हिस्सा है, जिसमें 29,800 से ज़्यादा ईमानदार घर खरीदारों ने अपनी जीवन भर की बचत और मेहनत की कमाई यूनिटेक लिमिटेड द्वारा शुरू की गई आकर्षक आवास योजनाओं/परियोजनाओं में निवेश की थी।
यूनिटेक लिमिटेड के प्रमोटरों (रमेश चंद्रा, संजय चंद्रा, अजय चंद्रा, आदि) ने सह-षड्यंत्रकारियों के साथ मिलकर एक आपराधिक षडयंत्र रचा और निवेशित राशि को आपराधिक रूप से इधर-उधर करके, स्तरीकृत कर और धनशोधन कर घर खरीदारों को धोखा दिया। घर खरीदारों को अंधेरे में रखा गया और निर्धारित समय सीमा के बाद भी उन्हें कोई घर नहीं दिया गया।
ईडी की जांच से पता चला है कि यूनिटेक लिमिटेड को घर खरीदारों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त कुल 16075.89 करोड़ रुपये की राशि में से, 7794.35 करोड़ रुपये की राशि यूनिटेक लिमिटेड द्वारा गैर-अनिवार्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट की गई थी।
ईडी की जांच से पता चला है कि रमेश चंद्रा और उनके परिवार ने अपनी विभिन्न बेनामी फर्मों और निजी संस्थाओं में उक्त धनराशि को अलग-अलग किया है। अपने निजी उपयोग के लिए धनराशि जमा की है।
- कंपनियों के शेयरों को उनके वास्तविक बाजार मूल्य से बहुत अधिक कीमतों पर अधिग्रहित किया। इस पद्धति का उपयोग करके धनराशि को कार्नौस्टी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और शिवालिक समूह को हस्तांतरित किया गया।
- वेंचर कैपिटल फंड का दुरुपयोग, जिसका उद्देश्य निवेशकों के धन का वास्तविक रियल एस्टेट व्यवसाय में उपयोग करना था, अपने निजी उपयोग के लिए किया गया। यूनिटेक लिमिटेड द्वारा इसी कार्यप्रणाली का उपयोग करके सीआईजी रियल्टी फंड-I, सीआईजी रियल्टी फंड-II और सीआईजी रियल्टी फंड-IV का दुरुपयोग किया गया।
- डायवर्ट किए गए धन को संयुक्त अरब अमीरात में स्थानांतरित करके और फिर कई बेनामी संस्थाओं और फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन को संयुक्त अरब अमीरात, केमैन द्वीप और सिंगापुर के रास्ते भारत वापस लाकर धन शोधन करना। चंद्रा परिवार ने इस तरीके से धन शोधन के लिए त्रिकार समूह (कंपनियों का) बनाया था।
- अपराध की आय (पीओसी) को भारत से बाहर ले जाना और परिवार के सदस्यों व बेनामी संस्थाओं के नाम पर संपत्तियाँ खरीदना। प्रीति चंद्रा ने इस धन का उपयोग करके दुबई में तीन फ्लैट खरीदे थे।
- यूनिटेक लिमिटेड में धन का प्रवाह और विभिन्न समूह कंपनियों/संस्थाओं में इसका डायवर्जन किया गया।
अब तक 1621.91 करोड़ रुपये की POC की पहचान की गई है, और 21 अनंतिम कुर्की आदेशों (पीएओ) के माध्यम से 1621.91 करोड़ रुपये की कुल 1291 संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। सभी पीएओ की पुष्टि न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा की गई है। इस फाइलिंग के साथ, ईडी ने अब माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए), नई दिल्ली के समक्ष तीन अभियोजन शिकायतें (एक मूल और दो अनुपूरक) दायर करके कुल 105 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी के रूप में आरोपित किया है। मामले में आगे की जाँच जारी है।