पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के पहले चरण के ठीक चार दिन पहले बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शारदा चिटफंड घोटाले में पहला आरोप पत्र दायर कर दिया। इसमें शारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य सृंजय बोस समेत कई लोगों के नाम हैं। 10 हजार पन्नों से भी ज्यादा बड़ा आरोप पत्र यहां विशेष सत्र न्यायालय में दायर किया गया।
ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट के तहत लगभग तीन साल की जांच के बाद अपने आरोप पत्र में 10 लोगों व 11 कंपनियों को अभियुक्त बनाया है। इनमें बोस के अलावा सुदीप्त सेन, उनके समूह की वरिष्ठ कर्मचारी देवजानी मुखर्जी, सेन की पत्नी पियाली सेन, पुत्र शुभजीत, व्यापारी शांतनु घोष व रमेश गांधी, शारदा के एजेंट प्रशांत नस्कर, पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह और उनकी पूर्व पत्नी मनोरंजना सिंह का नाम शामिल है। जांच एजेंसी ने इस मामले में अब तक लगभग 600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने के चार आदेश जारी किए हैं।
आरोप पत्र में इसका भी ब्योरा है। सूत्रों ने बताया कि आरोप पत्र में 338 में से 91 बैंक खातों के जरिये हुए लेनदेन का भी ब्योरा है। ईडी ने घोटाले की रकम ढाई हजार करोड़ बताते हुए हजारों दस्तावेजों की जांच की है। ईडी के सूत्रों का कहना है कि शारदा समूह की 90 फीसदी कंपनियां महज कागज पर थीं। उसकी 224 में से महज 17 कंपनियां ही कुछ काम करती थीं। इस आरोपपत्र में सिर्फ बंगाल में हुए घोटाले का ही जिक्र है। असम व ओडिशा में हुए घोटाले को इसमें शामिल नहीं किया गया है। ईडी सूत्रों ने बताया कि अभी इस मामले में और आरोप पत्र दायर किए जा सकते हैं।