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ED: फर्जी ऑडिट रिपोर्ट और 500 शेल कंपनियों का चक्रव्यूह, 6000 करोड़ के निवेश का खेल, करोड़ों की संपत्ति कुर्क

सार

प्रवर्तन निदेशालय  ने मेसर्स एमटेक ऑटो लिमिटेड, मेसर्स एआरजीएल लिमिटेड, मेसर्स एसीआईएल लिमिटेड, मेसर्स मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, और मेसर्स कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और समूह की अन्य कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है।
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प्रवर्तन निदेशालय। - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स एमटेक ऑटो लिमिटेड, मेसर्स एआरजीएल लिमिटेड, मेसर्स एसीआईएल लिमिटेड, मेसर्स मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, और मेसर्स कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और समूह की अन्य कंपनियों के साथ-साथ मुख्य प्रमोटर अरविंद धाम व अन्य से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में विशेष पीएमएलए कोर्ट, राउज एवेन्यू, नई दिल्ली में एक पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज की है। न्यायालय ने एमटेक समूह के प्रमोटरों और परिवार के सदस्यों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, बैंकरों, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स, स्टॉक मार्केट ऑपरेटरों और अन्य सहित सभी 56 आरोपियों को 07.08.2025 को बीएनएसएस की धारा 223 के तहत नोटिस जारी करने पर संतोष जताया है। इस मामले में आरोपियों ने सीए से फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार कराकर 500 शेल कंपनियों का चक्रव्यूह तैयार किया था। यह 6000 करोड़ रुपये के निवेश का खेल था। इस केस में ईडी ने अभी तक 6261.37 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।  

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ईडी ने 27.02.2024 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। तब मेसर्स एमटेक ऑटो समूह की कंपनियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से प्राप्त ऋणों के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई की गई। इसके अलावा, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों के आधार पर सीबीआई ने आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है, जिसमें बैंक ऋणों को अवैध रूप से डायवर्ट करने और इस प्रकार बैंकों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने का आरोप है। 

ईडी की जांच में पता चला है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने फर्जी ऑडिट रिपोर्ट दाखिल की। समूह द्वारा किए गए धोखाधड़ीपूर्ण डायवर्जन और आपराधिक हेराफेरी को चिह्नित किए बिना पुस्तकों में अचल संपत्तियों की काल्पनिक मुद्रास्फीति को कवर किया। उचित जांच-पड़ताल किए बिना ऋणों को इस प्रकार जारी रखने तथा बाद में पुनर्गठित ऋण के भुगतान में चूक के कारण इन बैंकों के सामने काफी अधिक एनपीए की रिपोर्ट करने की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। 
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ईडी ने इससे पहले मुंबई के उन संदिग्ध शेयर बाजार संचालकों को लेकर गहन पूछताछ की थी, जिन्होंने कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लगभग 1000 करोड़ रुपये के निवेश को धोखा देने में एमटेक समूह की मदद की थी। एमटेक समूह ने इन शेयर संचालकों को कंपनी के शेयरों में कृत्रिम मूल्य हेरफेर के जरिए हेरफेर करने के लिए नियुक्त किया था। धन के लेन-देन से पता चला कि एमटेक समूह ने स्वयं अपनी कंपनी के शेयरों की कीमतों में कृत्रिम हेरफेर के लिए इन मुंबई स्थित शेयर संचालकों को अपनी धनराशि (जिसे बैंक ऋणों के माध्यम से गबन किया गया था) प्रदान की थी। 

ईडी के मुताबिक, एक बार ऋण चुकौती में चूक होने के बाद, समूह की कंपनियों को वित्तीय लेनदारों और परिचालन लेनदारों द्वारा एनसीएलटी में ले जाया गया। कुल 15 समूह कंपनियों को एनसीएलटी में ले जाया गया है। अंततः इन कंपनियों में औसतन 81% की भारी कटौती के साथ मामलों का निपटारा किया गया। यानी इन लेनदारों को औसतन अपने कुल दावों का केवल 19% ही प्राप्त हुआ है। ईडी ने इन एनसीएलटी कार्यवाहियों के संबंध में भी जांच जारी रखी थी, जहां प्रमोटरों के लाभ के लिए आईबीसी प्रावधानों का दुरुपयोग किया गया था। 

यह पता चला कि एनसीएलटी की कार्यवाही से पहले ही, प्रमोटर समूह ने अपनी मुखौटा संस्थाओं/बेनामी व्यक्तियों का उपयोग करके कम मूल्यांकन वाले हस्तांतरणों द्वारा अपनी संपत्ति को अलग कर दिया था। उक्त अनुपूरक अभियोजन शिकायत में समाधान पेशेवरों द्वारा निभाई गई भूमिका को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने आईबीसी के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

समूह की कंपनियों के समाधान के बाद, अरविंद धाम की व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही 23 लेनदारों की एक समिति द्वारा 38,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावों के साथ शुरू की गई थी। दावे के खिलाफ, अभियुक्तों द्वारा 35 करोड़ रुपये का समाधान प्रस्तावित किया गया था। उसी समय, ईडी ने इस समूह द्वारा बनाई गई लगभग 500 शेल कंपनियों के एक चक्रव्यूह का पता लगाया था, जो कि गबन किए गए धन से 6000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियां खरीदने व रखने के लिए बनाई गई थीं। 

कई लेयरिंग के माध्यम से ऐसी शेल कंपनियों ने उक्त अचल संपत्तियों को खरीद लिया था। प्रमोटरों को ऐसी शेल कंपनियों का अंतिम लाभार्थी बना दिया गया था। एनसीएलटी की कार्यवाही से इसे छिपाने के लिए प्रभावी रूप से एक जटिल लेयरिंग प्रक्रिया के साथ संपत्ति खरीदी गई थी और समाधान पेशेवर उन्हें सौंपी गई उचित परिश्रम भूमिका नहीं निभा सके। बता दें कि आईबीसी के माध्यम से ऋणदाताओं को 6,300 करोड़ रुपये की वसूली की गई है, जो एसआरए द्वारा पूरी की जाने वाली शर्तों के अधीन अभी भी जारी है।

ईडी ने इस केस में 40 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली थी, जिसके परिणामस्वरूप अरविंद धाम की गिरफ्तारी हुई। 6 सितंबर, 2024 को अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। ईडी ने 05.09.2024 को 5115.31 करोड़ रुपये की चल और अचल दोनों संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया था, जिसकी बाद में न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा पुष्टि की गई थी। आगे की जांच में 557.49 करोड़ रुपये और 588.57 करोड़ रुपये के दो अनंतिम कुर्की आदेश जारी किए गए।

इस मामले में कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य अब 6261.37 करोड़ रुपये है, जिनमें से अधिकांश का मूल्य बही मूल्य/सर्किल दर पर माना गया है। हालाँकि, बाजार मूल्य काफी अधिक होगा, और कुर्क की गई अधिकांश संपत्तियों पर धोखाधड़ी से पीड़ित किसी भी ऋणदाता का प्रभार नहीं था। उपरोक्त व्यापक निष्कर्षों के मद्देनजर, प्रमोटरों, प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों, लेखा परीक्षकों, बैंकरों, समाधान पेशेवरों और मुंबई स्थित स्टॉक ऑपरेटरों की भूमिकाओं को शामिल करते हुए उक्त पूरक अभियोजन शिकायत दायर की गई है।

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पीएसीएल - फोटो : ANI
ED: एक गोली, जिसे पाकिस्तान को देने के लिए मना किया था, इसके बावजूद मलेशिया के रास्ते उसे पड़ोसी मुल्क में पहुंचा दिया गया  
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स ल्यूसेंट ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ विशेष पीएमएलए न्यायालय, हैदराबाद में अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। न्यायालय ने 06.08.2025 को पीसी का संज्ञान लिया है। यह मामला 'ट्रामाडोल' टेबलेट, जो गंभीर दर्द को कम करती है, के निर्यात से जुड़ा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक कंपनी को उक्त गोली का पाकिस्तान में निर्यात करने से मना किया था, लेकिन आरोपियों ने मलेशिया के जरिए वह गोली, पड़ोसी मुल्क 'पाकिस्तान' तक पहुंचा दी। ईडी ने इस मामले में कार्रवाई की है। 

ईडी ने एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 36ए के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), बेंगलुरु क्षेत्रीय इकाई द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरु की थी। मनोदैहिक पदार्थों के संबंध में उल्लंघन, भारत से उनके अवैध निर्यात, एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत दिए गए आदेशों का उल्लंघन और मेसर्स ल्यूसेंट ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड, इसके प्रबंध निदेशक विनोद जैन, एसोसिएट वाइस-प्रेसिडेंट देवरसेट्टी साई विकास, लॉजिस्टिक्स और सेल्स एक्जीक्यूटिव गंगुला ईश्वर राव और अन्य द्वारा लिए गए विभिन्न निर्यात प्राधिकरणों से संबंधित अभिलेखों व दस्तावेजों की जालसाजी के लिए जांच शुरू की गई थी।

ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स ल्यूसेंट ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड, अन्य बातों के अलावा, पाकिस्तान स्थित अपने विदेशी ग्राहकों के साथ ट्रामाडोल के निर्माण और निर्यात के व्यवसाय में है। कंपनी ने शुरुआत में पाकिस्तान को ट्रामाडोल निर्यात करने के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से एनओसी लिया था। हालांकि, बाद में, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने पाकिस्तान को ट्रामाडोल के निर्यात के लिए मंजूरी देने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान को ट्रामाडोल के निर्यात पर प्रतिबंध को दरकिनार करने के लिए, आरोपी व्यक्तियों ने अपने विदेशी ग्राहक मेसर्स सीएचआर ओलेसन फार्मास्यूटिकल्स-डेनमार्क स्थित कंपनी के माध्यम से पाकिस्तान को 4.12 करोड़ रुपये (लगभग) मूल्य के 13,800 किलोग्राम ट्रामाडोल को अवैध रूप से और मेसर्स एसएम बायोमेड -मलेशिया स्थित कंपनी के माध्यम से पाकिस्तान को 1.34 करोड़ रुपये (लगभग) मूल्य के 5000 किलोग्राम ट्रामाडोल का निर्यात किया। 

 
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