उत्तराखंड में नकली राजस्व रिकॉर्ड व जाली मालिकाना हक से जमीन की धोखाधड़ी, सबसे ज्यादा होने वाला आर्थिक अपराध
देहरादून में जमीन के बड़े घोटाले के मामले में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), देहरादून ने आरोपी नवीन कुमार मित्तल को 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया है। उन्हें देहरादून की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया गया। ईडी का कहना है कि उत्तराखंड में नकली राजस्व रिकॉर्ड और जाली मालिकाना के जरिए जमीन की धोखाधड़ी, राज्य में यह सबसे ज्यादा होने वाला आर्थिक अपराध बन गया है।
ईडी ने यह जांच उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। ये सभी केस देहरादून में जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी से जुड़े थे। पुलिस ने इनमें से दो एफआईआर में चार्जशीट दाखिल की हैं, जिनमें नवीन कुमार मित्तल को मुख्य आरोपी और धोखाधड़ी का मुख्य फ़ायदा उठाने वाला बताया गया है। ईडी पहले ही इस मामले में हुमायूं परवेज़, मो. वकील और मुकेश कुमार गुप्ता के ख़िलाफ़ देहरादून की स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दाखिल कर चुकी है।
जांच से पता चला है कि नवीन कुमार मित्तल ने नकली कागजात के जरिए अपने सह-आरोपी को जमीन का असली मालिक बताया और ज़मीन को अनजान खरीदारों को बेच दिया। बिक्री से मिली रकम, जिसमें लगभग 3.24 करोड़ रुपये की 'अपराध से हुई कमाई' शामिल थी, उसे सह-आरोपी के नाम पर खोले गए बैंक खाते में जमा किया गया। बाद में वह राशि उसके कंट्रोल वाली कंपनियों में ट्रांसफर कर दी गई। सीएफएसएल द्वारा बैंक के असली रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच से यह साबित हुआ है कि यह खाता असल में नवीन कुमार मित्तल ही चलाते थे।
बार-बार समन मिलने के बावजूद, नवीन कुमार मित्तल जांच में शामिल नहीं हुए। ईडी के अनुसार, उन्होंने गवाहों को प्रभावित किया। अपने ही रिश्तेदारों को एजेंसी के सामने बयान देने से रोका। साथ ही, उन्होंने नए नकली कागज़ात बनाकर गलत लेन-देन को सही दिखाने की कोशिश की। अगस्त 2026 में ईडी द्वारा उनके ठिकानों पर की गई छापेमारी में दोषी ठहराने वाले कागजात और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए। ज़मीन से जुड़े अन्य धोखाधड़ी के मामलों में भी उनकी भूमिका सामने आई है और उनकी जांच चल रही है।
नकली रेवेन्यू रिकॉर्ड और जाली मालिकाना हक, इसके जरिए ज़मीन की धोखाधड़ी, ऐसे केस उत्तराखंड में सबसे ज़्यादा होने वाले आर्थिक अपराधों में शामिल हैं। इससे नागरिकों की जीवन भर की बचत का नुकसान होता है। जमीन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर जनता का भरोसा कम होता है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से यह साफ संदेश जाता है कि ऐसी धोखाधड़ी से पैसा कमाने और उसे वैध दिखाने (मनी लॉन्ड्रिंग) वालों को सज़ा दिलाई जाएगी। पीएमएलए के तहत गलत तरीके से बनाई गई संपत्ति का पता लगाकर उसे अटैच और जब्त किया जाएगा।