ED ने PACL पोंजी स्कीम मामले में एक और बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 1986 करोड़ रुपए की नई प्रॉपर्टी जब्त की है। यह देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, जिसमें लाखों लोगों का पैसा फंसा हुआ है।
PACL Money Laundering: प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर पर्ल्स ग्रुप (PACL) पर बड़ा शिकंजा कसा है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में 1986 करोड़ रुपए से ज्यादा की नई प्रॉपर्टी अटैच की है। यह प्रॉपर्टी पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले में जब्त की गई कुल प्रॉपर्टी की कीमत 7589 करोड़ रुपए हो गई है। ED इस मामले की लंबे समय से जांच कर रही है।
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क्या है पूरा घोटाला?
बता दें कि ED की जांच CBI के एक पुराने केस पर आधारित है। यह केस PACL लिमिटेड और उसके प्रोमोटर निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ था। भंगू की मौत अगस्त 2024 में हो चुकी है। ED के मुताबिक, PACL ने एक गैर-कानूनी इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाई थी। इसके जरिए देशभर के लाखों लोगों से 60,000 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए गए। लोगों को खेती की जमीन बेचने और उसे डेवलप करने का झांसा दिया गया था।
कैसे फंसाए गए निवेशक?
इस केस में लोगों को पैसा लगाने के लिए लालच दिया गया। उनसे कैश या किश्तों में पेमेंट ली गई। इसके बदले में उन्हें गुमराह करने वाले कागज साइन कराए गए। इन कागजों में एग्रीमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसी चीजें शामिल थीं। ईडी का कहना है कि ज्यादातर लोगों को कभी कोई जमीन नहीं मिली। आज भी करीब 48,000 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस नहीं मिले हैं।
घोटाले के पैसे से खरीदी प्रॉपर्टी
ED ने बताया कि घोटाले के पैसे का इस्तेमाल ये प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया था। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कुल 37 प्रॉपर्टी को अटैच किया है। ये प्रॉपर्टी पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में हैं। इनकी कुल कीमत 1986.48 करोड़ रुपए आंकी गई है। ED ने इस मामले में अब तक तीन चार्जशीट भी दाखिल की हैं। यह केस 2016 में दर्ज किया गया था। यह देश का सबसे बड़ा पोंजी स्कीम घोटाला माना जाता है।