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बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने 51 करोड़ की संपत्ति अटैच की, फिश टैंक और पॉल्ट्री फार्म भी शामिल

Thu, 02 Jan 2020 02:57 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में विशाखापट्टनम के एक व्यक्ति और उसके परिवार की 51 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। इसमें फिश टैंकों, पॉल्ट्री फार्मों और बैंक बैलेंस भी शामिल है। ईडी ने बुधवार को बताया कि यह संपत्ति कुमार पप्पू सिंह, उसके परिवार और कंपनियों से संबंधित है। ईडी का मामला विशाखापट्टनम में सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है। इसमें आईडीबीआई बैंक अधिकारियों, कुछ कर्ज एग्रीगेटर्स और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

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इन लोगों पर मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर कर्ज लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। ईडी का आरोप है कि पप्पू सिंह ने 87 लोगों के नाम पर केसीसी लोन लिया। ये लोग उसके परिवार के सदस्य, कर्मचारी और उन व्यक्तियों के नाम पर लिया जिन्होंने उसे अपनी संपत्तियां जमानत प्रतिभूतियों के तौर पर दी थीं। जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि कर्ज की रकम को अवैध तरीके से कर्ज लेने वालों के बैंक खातों से सिंह और उसकी कंपनियों के बैंक खातों में भेजी गई। 

कुल 69.46 करोड़ रुपये की रकम छोटे किसानों के लिए मंजूर की गई थी लेकिन इस रकम को आरोपी ने अपने और अपनी कंपनियों के नाम पर हस्तांतरित करा ली। अनंतिम आदेश के तहत आवास, फिश टैंकों और पॉल्ट्री फार्मों को अटैच किया गया। इन संपत्तियों की कीमत 35.70 करोड़ रुपये है जबकि विभिन्न बैंक खातों से 15.73 करोड़ रुपये अटैच किए गए।
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गुजरात में एक कंपनी की 18 करोड़ की संपत्ति जब्त
दूसरी ओर, बैंक धोखाधड़ी के एक और मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुजरात की एक कंपनी की 18 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। सूरत की कंपनी नकोडा लिमिटेड, इसके सीएमडी बाबूलाल जमनलाल जैन और उनके बेटे और कंपनी के एमडी देवेंद्र बाबूलाल जैन के खिलाफ ईडी की जांच चल रही है।
 
जांच एजेंसी ने बताया कि कंपनी और इसके अधिकारियों पर बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। ईडी ने कंपनी के नौ पवन टरबाइन जनरेटर और जमीन जब्त की। इसकी कीमत 18 करोड़ रुपये से अधिक है। ईडी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, गुजरात की इस कंपनी ने केनरा बैंक के नेतृत्व में 13 बैंकों के कंसोर्टियम से 2107 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। बाद में यह कंपनी बैंकों से लिए इस कर्ज को नहीं चुका सकी।

जांच में पता चला कि इस कंपनी ने पुनीत रौंगता नाम के एक व्यापारी और चार्टर्ड अकाउंट जगदीश सोमानी के साथ साठगांठ करके फैंसी कपड़ों की फर्जी खरीद चालान के आधार लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसीएस) तैयार किए और बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर बैंक धोखाधड़ी के इस मामले की जांच शुरू की थी। अब तक ईडी कंपनी की 393 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है।  

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