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ED: निवेशकों को ठगने वाले पीपल सिंह की 4.15 करोड़ की 87 संपत्तियां अटैच, ईडी ने की कार्रवाई; पढ़ें अहम खबरें

Mon, 27 Feb 2023 09:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निवेशकों से ठगी करने के आरोपी पीपल सिंह, उनकी कंपनी एनजीएचआई डेवलपर्स इंडिया और उसकी अन्य समूहों की कंपनियों की 4.15 करोड़ रुपये की 87 संपत्तियों को  अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश राज्यों में पोंजी योजना के नाम पर निवेशकों से ठगी करने और उस पैसे से अन्य राज्यों में संपत्तियां बनाने वाले पीपल सिंह और उसकी कंपनी एनजीएचआई डेवलपर्स इंडिया और उसकी अन्य समूहों की कंपनियों की 4.15 करोड़ रुपये की 87 संपत्तियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इस योजना से हजारों निवेशकों के प्रभावित होने का दावा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद ईडी, जालंधर ने इस संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की थी।

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ईडी ने बताया, इस संबंध में नाइसर ग्रीन ग्रुप कंपनियों के प्रबंध निदेशक पीपल सिंह और अन्य के खिलाफ पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में आईपीसी की विभिन्न धाराओं में कई प्राथमिकी दर्ज की गईं हैं। पीपल सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसने हाईकोर्ट से यह दलील देते हुए जमानत प्राप्त कर ली थी कि वह निवेशकों को पैसा लौटा देगा, लेकिन उसने पैसा नहीं लौटाया। तरनतारन कोर्ट ने आदतन अपराधी घोषित किया हुआ है। 

मुख्य आरोपी पीपल सिंह और उसके सहयोगियों ने कई कंपनियां गठित कर पोंजी स्कीम के जरिए निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर फिक्स्ड और रिकरिंग डिपोजिट के रूप में पैसा लिया। लेकिन मैच्योरिटी के बाद उनका पैसा नहीं लौटाया और निवेशकों पर अपनी नई कंपनियों में धन को निवेश करने का दबाव बनाया। उसने इस पैसे से एनजीएचआई डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड और अन्य समूह की कंपनियों के नाम पर पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में विभिन्न अचल संपत्तियां खरीदीं।

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विवा समूह के निदेशक को पीएमएलएप अदालत से मिली जमानत
मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में विशेष पीएमएलए अदालत ने विवा समूह के निदेशक मेहुल ठाकुर को सोमवार को जमानत दे दी और कहा कि जेल का माहौल उसकी बीमारी से उबरने के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जनवरी 2021 में ठाकुर को हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) से 196 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विवा समूह को कई निष्क्रिय फर्मों के माध्यम से डायवर्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

ठाकुर पर एचडीआईएल के प्रवर्तकों (प्रमोटर) के नियंत्रण वाली एक कंपनी की दो संपत्तियों को बिना किसी मौद्रिक सोच- विचार के समूह को हस्तांतरित करने का भी आरोप है। इन संपत्तियों की कीमत 34 करोड़ रुपये थी। पिछले साल मार्च में बंबई उच्च न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर उन्हें छह महीने की अस्थायी जमानत दी थी। अंतरिम संरक्षण इस साल जनवरी तक बढ़ा दिया गया था। ठाकुर ने इसके बाद उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी याचिका वापस ले ली और विशेष अदालत से मामले के गुण-दोष और चिकित्सा आधार पर जमानत मांगी।

विशेष न्यायाधीश एम जी देशपांडे ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि आवेदक (ठाकुर) के मेडिकल रिकॉर्ड से स्पष्ट संकेत मिलता है कि उच्च न्यायालय द्वारा अस्थायी जमानत पर रिहा किए जाने के बाद भी उनकी मानसिक बीमारी लगातार बिगड़ रही है।
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