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ED: बंगाल में 'पाकिस्तानी' नागरिक का खेल, बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से सीमा पार कराकर बनवा रहा 'पहचान पत्र'

Tue, 16 Dec 2025 08:31 PM IST
संध्या डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

पश्चिम बंगाल में ईडी को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाकर्मियों ने एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है जो फर्जी पहचान से पश्चिम बंगाल में रह रहा था। 
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ईडी। - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में ईडी ने एक ऐसे मामले की जांच की है, जिसमें सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पाकिस्तान का एक नागरिक, फर्जी पहचान से पश्चिम बंगाल में रह रहा था। हैरानी की बात है कि वह खुद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बंगाल में था, लेकिन उसने फर्जी तरीके से बांग्लादेश के लोगों को भारत की नागरिकता दिलाने का खेल शुरु कर दिया। आजाद हुसैन, जिसका असली नाम आजाद मलिक था, उसने इंदुभूषण हलदर के साथ मिलकर बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को पैसे के बदले धोखाधड़ी से भारतीय पहचान पत्र दिलाने का काम प्रारंभ किया था। ये दोनों व्यक्ति पकड़े गए। फिलहाल, ये ईडी की न्यायिक हिरासत में हैं।  
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने पाकिस्तानी नागरिक आजाद मलिक, उर्फ अहमद हुसैन आजाद, उर्फ आजाद हुसैन के मामले में इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल और चार अन्य के खिलाफ 11.12.2025 को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), कोलकाता के समक्ष प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। विशेष न्यायालय, कोलकाता ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा आजाद मलिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि आजाद हुसैन, जो एक पाकिस्तानी नागरिक है, मोना मलिक के पुत्र आजाद मलिक की फर्जी पहचान से भारत में रह रहा था। उसने यहां पर गैर कानूनी काम करना शुरु कर दिया। 

हुसैन ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता दिलाने के लिए एक लोकल व्यक्ति की मदद ली। हर केस के लिए बाकायदा फीस 
तय कर दी गई। पैसे के बदले धोखाधड़ी से भारतीय पहचान पत्र दिलाने का काम शुरु कर दिया। आजाद मलिक को इस साल 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल को 13 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच के दौरान, आजाद मलिक से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप आपत्तिजनक दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि आजाद मलिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद उर्फ आज़ाद हुसैन एक पाकिस्तानी नागरिक है। वह फर्जी भारतीय पहचान के तहत बंगाल में रह रहा है। उसने अपने साथियों की मदद से फर्जी जानकारी का इस्तेमाल करके आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे कई भारतीय पहचान पत्र हासिल किए थे।
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वह भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध सीमा पार धन हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए हवाला नेटवर्क भी चलाता था। इसके लिए वह नकद और यूपीआई के माध्यम से भुगतान एकत्र करता था। ईडी की जांच में पता चला है कि आजाद हुसैन ने इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल के माध्यम से आजाद मलिक की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके अपना धोखाधड़ी से प्राप्त भारतीय पासपोर्ट नवीनीकृत कराया था। आजाद हुसैन उर्फ आजाद मलिक बांग्लादेशी ग्राहकों को, जो भारतीय पासपोर्ट बनवाने में रुचि रखते थे, इंदुभूषण हलदर के पास भेजता था। आजाद हुसैन अपने साथी इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल की मदद से जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन करता था। इसके बाद जाली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी करवाता था।

वे पासपोर्ट सहित सभी भारतीय पहचान दस्तावेजों को बनवाने के लिए लगभग 50,000 रुपये लेते थे। आजाद हुसैन और इंदुभूषण ने अपने ग्राहकों के लगभग 300-400 पासपोर्ट आवेदनों को आगे बढ़ाया था। 29 ऐसे पासपोर्ट आवेदन थे, जिनमें इंदुभूषण हलदर ने आयकर रसीद और भुगतान पर्चियों की प्रतियां जमा की थीं। ये बिल्कुल एक जैसी पाई गईं और उन पर आयकर प्राधिकरण की कोई मुहर नहीं थी। ये दस्तावेज लगातार "एक ही प्रकार के" थे। उनमें एकसमान रूप से आवश्यक मुहर का अभाव था। स्पष्ट रूप से भारतीय पासपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से इन्हें जाली बनाया गया था। 

जांच के दौरान यह पाया गया कि इंदुभूषण हल्दर द्वारा संदर्भित कुछ पासपोर्ट आवेदनों और उनके संलग्न दस्तावेजों में कई ऐसी विसंगतियां थीं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। 
इससे यह साबित होता है कि पासपोर्ट जाली या मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए थे। जांच में पता चला कि एक मामले में, दो भाइयों ने पासपोर्ट आवेदन पत्र में अपनी जन्मतिथि क्रमशः 01.01.1988 और 01.04.1988 दर्ज कराई थी, जिसमें केवल तीन महीने का अंतर था, जो जैविक रूप से असंभव है। 

एक अन्य मामले में, दो भाइयों की जन्मतिथि क्रमशः 24.10.1975 और 24.05.1976 दर्ज थी, यानी केवल सात महीने का अंतर, जो फिर से संदिग्ध है। इसके अलावा, जांच के दौरान, उपरोक्त दोनों व्यक्तियों के एक अन्य भाई के पास बांग्लादेश का राष्ट्रीय पहचान पत्र मिला, जो उनके नाम पर जारी किया गया था। उसमें उन्हें ढाका, बांग्लादेश का निवासी दिखाया गया था।

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि आरबीआई के नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त पूर्ण-स्तरीय मुद्रा परिवर्तक (एफएफएमसी) कंपनी, मेसर्स गोल्डनाइज फॉरेक्स एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक आरबीआई के दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन में लिप्त थे। उन्होंने पाकिस्तानी नागरिक आजाद हुसैन को उसकी भारतीय पहचान न होने के बावजूद विदेशी मुद्रा काउंटर चलाने की अनुमति दी, जो कमीशन के बदले बिना किसी सहायक दस्तावेज के आम जनता को विदेशी मुद्रा बेचता था। 
आजाद हुसैन, मेसर्स गोल्डनाइज फॉरेक्स एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अन्य एफएफएमसी या एडी-आईआई बैंकों से विदेशी मुद्रा खरीदने के बाद, बिना किसी कानूनी रूप से आवश्यक दस्तावेज के घरेलू बाजार में उसे अवैध रूप से बेचते थे। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार दस्तावेजीकरण बनाए रखने के लिए, वे कई व्यक्तियों/संस्थाओं के नाम पर फर्जी बिक्री दिखाते थे। उनकी जानकारी व सहमति के बिना उनके दस्तावेजों का उपयोग करते थे।

कंपनी के निदेशकों ने अवैध धन को वैध बनाने के लिए व्यवस्थित रूप से अपनी कंपनी का दुरुपयोग किया। 80 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी रकम कई ग्राहकों को विदेशी मुद्रा की बिक्री के बहाने कंपनी के बैंक खातों में जमा की गई। जांच से पता चला है कि वास्तव में इनमें से अधिकांश लेनदेन में जाली दस्तावेज, फर्जी कैश मेमो और इन असंख्य ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान का अनधिकृत उपयोग शामिल था। इसके अलावा, धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 44 और धारा 45 के तहत आज़ाद हुसैन उर्फ़ आज़ाद मलिक उर्फ़ अहमद हुसैन आज़ाद (एक पाकिस्तानी नागरिक जो भारतीय नागरिक की फर्जी पहचान के तहत भारत में रह रहा है) के खिलाफ 13.06.2025 को अभियोग शिकायत दर्ज की गई थी। मुख्य न्यायाधीश, नगर सत्र न्यायालय ने 19.06.2025 को पीएमएलए के तहत अभियोग शिकायत का संज्ञान लिया है।
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