प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत 23.07.2025 को मेसर्स डेल्टा लिमिटेड और अन्य से जुड़ी 15.47 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ईडी ने 24.07.2025 को डेल्टा लिमिटेड और 7 अन्य के खिलाफ एलडी स्पेशल कोर्ट, कोलकाता में अंतिम अभियोजन शिकायत भी दायर की है।
ईडी ने विभिन्न रिट याचिकाओं पर जारी कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देश पर हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन, कोलकाता में दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। इसमें वेतन से नियमित कटौती के बावजूद भविष्य निधि (पीएफ) जैसे वैधानिक बकाया का भुगतान न करने का आरोप लगाया गया था। उक्त एफआईआर मेसर्स डेल्टा लिमिटेड और अन्य के खिलाफ कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और श्रमिकों की भविष्य निधि कटौती के दुरुपयोग के लिए दर्ज की गई थी।
ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स डेल्टा लिमिटेड और उसकी सहयोगी संस्थाओं के लगभग 800 कर्मचारियों को उनके भविष्य निधि ट्रस्ट (डेल्टा जूट एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड वर्कर्स प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट) का दुरुपयोग करके ठगा गया था। कंपनी को ईपीएफ अधिनियम के तहत एक छूट प्राप्त थी, जिसके तहत वह अपने ट्रस्ट के माध्यम से पीएफ राशि का प्रबंधन कर सकती थी। इस ट्रस्ट का उद्देश्य कर्मचारियों के लाभ के लिए स्वतंत्र रूप से काम करना और उनके पीएफ धन का उचित निवेश करना था।
हालांकि, इस उद्देश्य का उल्लंघन करते हुए, आपराधिक षड्यंत्र के तहत, पेशेवरों या फंड मैनेजरों के बजाय कर्मचारियों को ट्रस्टी नियुक्त किया गया। ये कर्मचारी केवल प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार कार्य करते थे और उनका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं था। वर्षों से, नियमों के निरंतर उल्लंघन और वित्तीय घाटे के कारण, 2014 में छूट रद्द कर दी गई। इसके बाद भी, और जब अदालती मामला चल रहा था, तब भी कंपनी कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काटती रही, लेकिन उसे न तो ट्रस्ट में और न ही पीएफ प्राधिकरणों के पास जमा किया गया।
ईडी के मुताबिक, यह राशि गलत तरीके से रखी गई। कंपनी ने जानबूझकर कर्मचारियों से काटे गए वैधानिक अंशदान को जमा करने से परहेज किया। रोकी गई राशि को बाद में वैध बनाया गया और ऋणों की अदायगी, व्यावसायिक खर्चों को पूरा करने और संपत्ति लेनदेन आदि सहित गैर-अनुमत उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। इस मामले में अपराध से प्राप्त कुल आय (पीओसी) 15.47 करोड़ रुपये है। अचल संपत्तियों के रूप में पूरी पीओसी की अस्थायी कुर्की की गई है और अंतिम अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है।