प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' (पीएमएलए) के तहत बर्नाडेट भरत वर्मा, भरतकुमार शंकरलाल वर्मा और अन्य लोगों की विभिन्न चल अचल संपत्तियों को अटैच किया है। लगभग 13.44 करोड़ रुपये की 13 अचल और चल संपत्तियां मुंबई, गोवा और मध्य प्रदेश में स्थित हैं। ये संपत्तियां फ्लैट, जमीन/प्लॉट, फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस आदि के रूप में हैं। ईडी ने इस मामले में मुंबई पुलिस द्वारा 'भारतीय न्याय संहिता' (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
फंड के डायवर्जन का तरीका
ईडी की जांच से पता चला है कि यूनाइटेड सर्विसेज क्लब की डिप्टी सेक्रेटरी (फाइनेंस) बर्नाडेट भरत वर्मा ने अपने पति भरतकुमार शंकरलाल वर्मा के साथ मिलकर, क्लब के असली/रेगुलर वेंडर्स के नामों से मिलते-जुलते कई फर्जी/डमी बैंक खाते खुलवाए। इसके बाद, उन्होंने क्लब के लगभग 77 करोड़ रुपये इन फर्जी/डमी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। अपराध से हासिल हुई यह रकम बाद में बर्नाडेट वर्मा, भरत वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों/सहयोगियों के पर्सनल या संयुक्त बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, बर्नाडेट भरत वर्मा और भरतकुमार शंकरलाल वर्मा ने अपराध से मिली रकम का इस्तेमाल कई अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट में भी पैसा निवेश किया। लगभग 11 करोड़ रुपये की रकम ज्योतिर्गमय फाउंडेशन (ट्रस्ट) के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई, जहां से बाद में यह पैसा चंद्र प्रकाश पांडे, उनके परिवार के सदस्यों और चंद्र प्रकाश पांडे (जो यूएस क्लब से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट थे) द्वारा नियंत्रित फर्मों व उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों में भेज दिया गया। इससे पहले, 20 मार्च 2026 को 34.51 करोड़ रुपये की कीमत वाली 35 संपत्तियां अटैच की गई थीं।