माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने नोट बंदी के फैसले को मोदी सरकार की सबसे बड़ी भूल करार दिया है। उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ कारगर युद्घ संबंधी सरकार के दावे के ठीक उलट यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ युद्घ साबित हो रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से देश में कालाधन उद्योग पर तो कई प्रभाव नहीं पड़ा, मगर आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी। करात ने आरोप लगाया कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया।
पूर्व महासचिव ने कहा कि इस फैसले से पूरे देश के प्रभावित होने की जानकारी होने के बावजूद हालात से निपटने केलिए ठोस तैयारी नहीं की गई। यही कारण है कि नोट बंदी की घोषणा वाले दिन एक हफ्ते में सबकुछ ठीक हो जाने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री ने 50 दिन का समय मांगा। अब तो वह इससे भी आगे परेशानी जारी रहने की बात कर रहे हैं।