पिछले आर्थिक सर्वे में केंद्र सरकार ने अनुमान लगाया था कि देश वित्त वर्ष 2025-26 में 6.3 से 6.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकता है। अब तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और विश्व बैंक सहित तमाम एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट से पूर्व 29 जनवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वे पेश करेंगी जिसमें यह पता चल जाएगा कि भारत वस्तुतः कितनी विकास दर हासिल करने में सफल रहा है।
पिछला वर्ष भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती भरा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ इजरायल-फिलिस्तीन और ईरान के मोर्चे पर संकट बना रहा। इससे पूरी दुनिया के व्यापार पर असर पड़ा है। भारत की रूस से सस्ती दरों पर खरीदे जा रहे तेल को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इससे पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में हलचल मच गई। इन घटनाओं से भारत का व्यापार कितना प्रभावित हुआ है, गुरुवार को पेश किए जाने वाले सर्वे से इसका पता भी चल सकता है।
मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में निर्माण को अर्थव्यवस्था की कुंजी बना रखा है। मेट्रो, सड़क, रेल और हवाई जहाज सहित तमाम मूलभूत ढांचे में भारी निवेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने का काम किया है। सर्वे में इसके बेहतर परिणाम आने से सरकार इसे और बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो सकती है जिसका खाका बजट में देखने को मिल सकता है।
पूर्व में विश्व और घरेलू चुनौतियों के कारण रोजगार निर्माण के क्षेत्र में भी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हैं। आर्थिक सर्वे से इस बात का पता चल सकता है कि इस मोर्चे पर सरकार ने कितनी सफलता हासिल की। यदि सर्वे में सरकार की चुनौती बढ़ी हुई दिखाई देती है तो आगामी बजट में रोजगार निर्माण को सबसे अधिक प्राथमिकता देखने को मिल सकती है।