TMC Demands Live Telecast of Meeting: टीएमसी ने चुनाव आयोग के एक पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त से मिलने का समय मांगा था। इस पर आयोग ने बैठक के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की है। इसी बीच अभिषेक बनर्जी ने मांग की है कि वो चाहते हैं कि इस बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए।
पश्चिम बंगाल विधानसभ चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। इसी कारण बिहार के बाद इसी राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया लागू की गई। इसी बीच यहां कई लोगों ने आत्महत्या की। इस पर टीएमसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के डर से लोग आत्महत्या कर रहे हैं। एक बीएलओ ने भी आत्महत्या की, जिसे लेकर टीएमसी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा और कहा कि राज्य के बीएलओ पर आयोग दबाव बना रहा है, इसीलिए वो आत्महत्या कर रहे हैं।
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अब एक तरफ टीएमसी है, जो एसआईआर का विरोध कर रही है। वहीं दूसरी ओर भाजपा और चुनाव आयोग है, जो चाहती है कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो। ऐसे में टीएमसी ने चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था। इस पर चुनाव आयोग ने टीएमसी को पत्र लिखा है कि वो 28 नवंबर को सुबह 11 बजे प्रतिनिधि मंडल से मिलने के लिए तैयार है।
बैठक को लाइव हो- अभिषेक बनर्जी
इस पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक चुनौती दे दी। अभिषेक का कहना है कि इस बैठक को सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाए और उसे लाइव प्रसारित किया जाए। इससे लोग खुद देख सकेंगे कि आयोग पांच सरल और वैध सवालों का क्या उत्तर देता है। इसके आगे उन्होंने लिखा कि कि क्या चुनाव आयोग अपनी पारदर्शिता साबित करने को तैयार है या फिर वह केवल बंद कमरों में ही काम करना पसंद करता है।
चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर उठाए सवाल
बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के लिए समय मांगा गया है, जो जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं। इसके विपरीत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त सरकार द्वारा चुने जाते हैं।
इसलिए आयोग द्वारा पारदर्शी और सौहार्दपूर्ण व्यवहार की जो चुनिंदा सूचनाएं प्रसारित हो रही हैं, वे केवल एक बनाई हुई छवि हैं। टीएमसी का कहना है कि यदि आयोग वास्तव में पारदर्शी है, तो उसे इन जनप्रतिनिधियों से मिलने में हिचक नहीं होनी चाहिए।
भाजपा ने भी दी प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग को लिखे लेटर पर पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरे भारत में हो रही है। ऐसे में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में इतना हंगामा क्यों कर रही हैं? इसके साथ एक आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बीएलओ की मदद के लिए एक डेटा एंट्री ऑपरेटर चाहिए, लेकिन ममता बनर्जी एक भी नहीं दे रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पत्र लिखने से कुछ नहीं होने वाला है।