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ECI: चुनाव आयोग ने एसआईआर पर मांगा जनता का 'सर्टिफिकेट', वोट चोरी के आरोपों के बीच पांच सवाल पूछकर मांगा जवाब

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चुनाव आयोग - फोटो : अमर उजाला
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चुनाव आयोग ने पांच सवाल पूछकर एसआईआर पर जनता की राय मांगी है। इन सवालों में पूछा गया है कि क्या मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए या नहीं। मृत लोगों, दो या अधिक स्थानों पर मतदाता बने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने चाहिए या नहीं। चुनाव आयोग ने जनता से इस बात पर भी अपनी राय देने के लिए कहा है कि क्या दूसरे स्थान पर चले गए लोगों या विदेशी लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने चाहिए, या नहीं? ये वही बुनियादी सवाल हैं जिनको लेकर चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम किया है। 

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राजनीतिक विज्ञान के विशेषज्ञ धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट करना चुनाव आयोग का दायित्व है। इसके लिए संविधान में उसे शक्ति और जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन आज चुनाव आयोग ने जो सवाल पूछे हैं, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं चुनाव आयोग विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को लेकर दबाव में है। वह अपनी छवि बचाने के लिए सीधे जनता के दरबार में पहुंच गया है। 

धीरेंद्र कुमार ने कहा कि देश की राजनीति के लिए यह तस्वीर सही नहीं है। किसी भी संवैधानिक संस्था का कार्य राजनीति का विषय नहीं बनना चाहिए। देश के स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यही आवश्यक है कि हर संवैधानिक संस्था अपने-अपने दायित्यों को पूरा करे। यह प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए कि इस पर किसी को कोई संदेह न हो। 
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'जनता का भरोसा चुनाव आयोग के साथ'
उन्होंने कहा कि बिहार की जनता राजनीतिक तौर पर बहुत परिपक्व है। यदि किसी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटेगा तो बिहार का मतदाता इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा और इसको लेकर बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो सकता है। लेकिन इस मामले पर जनता की तरफ से अब तक कोई विरोध न होना इस बात का प्रमाण है कि जनता को एसआईआर से कोई शिकायत नहीं है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उसका भरोसा बरकरार है।

'नकारात्मक राजनीति के कारण सेना के बाद चुनाव आयोग भी सबूत देने को हुआ मजबूर' 
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. परमवीर सिंह ने कहा कि पिछले 10-12 साल में देश में एक नई तरह की राजनीति पैदा हुई है। इसमें कभी सेना से तो कभी अदालतों से अपने कार्यों के लिए प्रमाण मांगा जा रहा है। सेना ने जिस तरह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरे देश को वीडियो दिखाकर अपने शौर्य का प्रमाण दिया है, यह भी विपक्ष के उन्हीं आरोपों का परिणाम है जो बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद उठाए गए थे। 

'आरोपों की मर्यादा समझे विपक्ष'
ऐसे में संभवतः चुनाव आयोग भी जनता की राय के द्वारा अपने कार्यों को सही प्रमाणित कराना चाहता है। हालांकि, उनकी राय है कि इस तरह से किसी संवैधानिक संस्था को सीधे विपक्ष की राजनीति के दबाव में आकर सवाल-जवाब नहीं करना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग की यह मर्यादा भी एक तरफा नहीं हो सकती। विपक्ष को भी अपने आरोप-प्रत्यारोप की सीमा तय करनी चाहिए। 

राहुल के सवालों के जवाब दे चुनाव आयोग: कांग्रेस 
कांग्रेस प्रवक्ता अनुज अत्रि ने अमर उजाला से कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। उसके कार्य और जिम्मेदारी संविधान और देश की जनता के प्रति होती है। लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली ने विपक्ष के साथ-साथ जनता के मन में भी गहरे सवाल पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपने सवाल पूछने की बजाय उन सवालों के जवाब देने चाहिए जिसे राहुल गांधी ने उठाए थे। 

अनुज अत्रि ने कहा कि चुनाव आयोग के पास इन सवालों के क्या जवाब हैं कि महाराष्ट्र में मतदान का समय खत्म होने के बाद भी मतदान करने दिया गया। चुनाव आयोग को यह भी बताना चाहिए कि आज के डिजिटल युग में मतदान की संख्या और प्रतिशत तुरंत मिलने की बजाय दो-तीन दिन बाद तक अपडेट किए जाते रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इन प्रश्नों की आड़ में उन सवालों से नहीं बच सकता जो इस समय जनता के मन में उठ रहे हैं। 

हमारे सवालों के जवाब क्यों नहीं देता चुनाव आयोग: राजद  
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण से किसी को कोई आपत्ति नहीं है। मृत लोगों और दूसरे स्थान पर चले गए लोगों के नाम भी मतदाता सूची से अवश्य हटने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सवाल पूछने की बजाय विपक्ष के इन सवालों का जवाब देना चाहिए कि एसआईआर का काम बारिश के समय क्यों किया जा रहा है। चुनाव आयोग को यह भी बताना चाहिए कि उसने सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के पहले आधार को पहचान पत्र के तौर पर स्वीकार क्यों नहीं किया। 

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जिस तरह से कई राज्यों में चुनाव हुए हैं और मतदान में गड़बड़ियां पाई गई हैं, उनको देखते हुए चुनाव आयोग को अपनी कार्य प्रणाली दुरुस्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग कोई राजनीतिक दल नहीं है कि उससे सवाल-जवाब किया जाए, लेकिन वह एक संवैधानिक संस्था है और उसे सबकी बात सुनते हुए देश की जनता के हित में काम करना चाहिए।

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