मतदाता सूची में हेरफेर और डुप्लीकेट मतदाता पहचान पत्र को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर चुनाव आयोग गंभीर है। इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई कदम उठाए हैं। अफसरों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने को लेकर चर्चा के लिए शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई है। इसके अलावा करीब 25 साल से लंबित मुद्दों को हल करने की भी पहल की है। अफसर बताते हैं कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची शुद्धिकरण समेत तमाम मुद्दों पर राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे हैं।
संसद के भीतर और बाहर जिस डुप्लीकेट वोटर कार्ड (ईपीआईसी) के नंबरों को लेकर जमकर बवाल हो रहा है। साथ ही राजनीतिक दल इसके जरिये चुनाव आयोग की वैधता पर ही सवाल उठे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी यह मुद्दा उठाया था। बीते शुक्रवार को चुनाव आयोग (ईसी) ने कहा था कि वह दशकों पुरानी डुप्लिकेट मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबरों की समस्या को अगले तीन महीने में हल कर लेगा। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव और विधायी सचिव के साथ बैठक बुलाई है।
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अफसरों का कहना है कि पिछले महीने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग ने कई कदम उठाए हैं। आयोग ने लंबे समय के बाद मतदाता पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर सर्वदलीय बैठकें आयोजित करने की पहल की है। यह बैठकें 31 मार्च से पहले आयोजित कराई जानी हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य दलों से 30 अप्रैल तक मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण सहित विभिन्न मुद्दों पर सुझाव भी मांगे गए हैं।
इसके अलावा चुनाव आयोग ने लगभग 25 वर्षों से लंबित डुप्लीकेट मतदाता पहचान पत्र संख्या के मुद्दे को अगले तीन महीनों के भीतर निपटाने का भी संकल्प लिया है। वहीं आयोग ने पहली बार कुछ राजनीतिक दलों को अपने क्षेत्र स्तर के कार्यकर्ताओं जैसे बूथ स्तर के एजेंटों, मतदान एजेंटों, मतगणना एजेंटों और चुनाव एजेंटों को चुनावी प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में प्रशिक्षित करने के लिए भी राजी किया है।
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चुनाव कानून के नियम का दिया हवाला
बताया जाता है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23, जिसे चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 कहा जाता के मुताबिक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मौजूदा या भावी मतदाताओं से स्वैच्छिक आधार पर पहचान स्थापित करने के लिए आधार संख्या प्रदान करने की मांग कर सकते हैं। यह कानून मतदाता सूची को आधार डाटाबेस के साथ स्वैच्छिक रूप से जोड़ने की अनुमति देता है।
सरकार ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि आधार-वोटर कार्ड सीडिंग अभ्यास प्रक्रिया संचालित है और प्रस्तावित लिंकिंग के लिए कोई लक्ष्य या समयसीमा तय नहीं की गई है। इसके अलावा जो लोग अपने आधार विवरण को मतदाता सूची से नहीं जोड़ते हैं, उनके नाम मतदाता सूची से नहीं काटे जाएंगे।
टीएमसी ने समान ईपीआईसी नंबर को लेकर दर्ज कराई थी शिकायत
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने कई राज्यों में डुप्लिकेट मतदाता पहचान पत्र नंबरों का मुद्दा उठाया और चुनाव आयोग पर कवर-अप का आरोप भी लगाया है। टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कोलकाता में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और एक ही मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर के बारे में अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के मंत्री और कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने पत्रकारों से कहा कि प्रत्येक मतदाता के पास एक विशिष्ट पहचान पत्र संख्या होनी चाहिए और उन्होंने इसे सुनिश्चित करने के लिए भौतिक सत्यापन की मांग की।
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