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चुनाव आयोग का फैसला: दो लोकसभा और 14 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव 17 अप्रैल को

Tue, 16 Mar 2021 07:42 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय निर्वाचन आयोग
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भारतीय चुनाव आयोग ने मंगलवार को देश में खाली पड़ी संसदीय सीटों पर चुनाव के बारे में घोषणा की। आयोग ने कहा कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के दो संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों और विभिन्न राज्यों की 14 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में उप चुनाव के लिए 17 अप्रैल को मतदान होगा। बता दें कि आंध्र प्रदेश में 23-तिरुपति और कर्नाटक में 2-बेलगाम संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव होना है। इन चुनावों की मतगणना दो मई को होगी।

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विधानसभा उप चुनावों में गुजरात की मोरवा हदफ सीट, झारखंड की मधुपुर, कर्नाटक की बसावाकल्याण व मसकी, मध्यप्रदेश की दामोह, महाराष्ट्र की पंढरपुर, मिजोरम की सेरछिप, नगालैंड की नोकसेन, ओडिशा की पीपिली, राजस्थान की सहारा, सुजानगढ़ व राजसमंद, तेलंगाना की नागार्जुन सागर और उत्तराखंड की साल्त सीट पर मतदान होगा।
 

 

कहां किस सीट पर होगा चुनाव

विधानसभा सीटें
  • राजस्थान (3 सीटें) : सहारा, सुजानगढ़ और राजसमंद
  • मध्य प्रदेश (1 सीट) : दमोह
  • गुजरात (1 सीट) : मोरवा हदफ
  • महाराष्ट्र (1 सीट) : पंढरपुर
  • उत्तराखंड (1 सीट) : सल्ट
  • झारखंड (1 सीट) : मधुपुर
  • कर्नाटक (2 सीट) : बसवकल्याण और मस्की
  • मिजोरम (1 सीट) : सेरछिप
  • नगालैंड (1 सीट) : नोकसेन
  • ओडिशा (1 सीट) : पिपिली
  • तेलंगाना (1 सीट) : नागार्जुन सागर

लोकसभा
  • आंध्र प्रदेश (1 सीट) : तिरुपति
  • कर्नाटक (1 सीट) : बेलगाम
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एक साथ चुनाव होने से मतदान के प्रति उदासीनता कम होगी: संसदीय समिति

एक ओर जहां चुनाव आयोग ने मंगलवार को देश में खाली पड़ी संसदीय सीटों पर चुनाव के बारे में घोषणा की। वहीं दूसरी ओर देश में एक साथ चुनाव कराने की वकालत करते हुए संसद की एक समिति ने मंगलवार को कहा कि ऐसा होने से सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा, राजनीतिक दलों का खर्च कम होगा और मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा।

विधि एवं न्याय और कार्मिक मंत्रालयों पर विभाग संबंधी स्थायी समिति ने विधि मंत्रालय के लिए अनुदान की मांगों पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि समिति का यह मानना है कि एक साथ चुनाव होने से बार-बार चुनावों को लेकर मतदाता में पैदा हुई उदासीनता को कम किया जा सकेगा एवं आम जनता को, खासतौर पर मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

यह रिपोर्ट मंगलवार को दोनों सदनों में पेश की गई। समिति ने कहा कि उसकी राय है कि 'एक देश, एक चुनाव' या एक साथ सभी चुनाव कराने का विचार देश के लिए नया नहीं है क्योंकि 1952, 1957 और 1962 में पहले के तीन लोकसभा चुनाव के समय चुनाव एक साथ ही हुए थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि इसके मद्देनजर एक साथ चुनाव कराने के लिहाज से स्थानीय निकायों, विधानसभाओं और लोकसभा के लिए निश्चित कार्यकाल के लिए संविधान के कुछ प्रावधानों को संशोधित किया जा सकता है।
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