केंद्र सरकार की तरफ से सोशल मीडिया की मनमानी पर अंकुश लगाने का असर चुनावी माहौल पर भी दिखाई देगा। भारतीय चुनाव आयोग ने एक सप्ताह के अंदर चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल की गाइड लाइन जारी करने की बात कही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि चुनाव आयोग के अधिकारी धीरेंद्र शर्मा को केंद्र सरकार की नई सोशल मीडिया गाइडलाइंस के अध्ययन की जिम्मेदारी दी गई है। शर्मा आयोग के मौजूदा दिशा निर्देेशों की तुलना केंद्र की तरफ से जारी नए नियमों के साथ करेंगे। उनसे एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है।
इसके बाद आयोग नए सिरे से चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी करेगा। उन्होंने कहा, आयोग की कोशिश राज्यों में चुनावी हिंसा को रोकने के साथ-साथ मतदान को पारदर्शी और साफसुथरा भी रखने की है। वेबकास्टिंग के लिए भी आयोग ने विशेष आदेश जारी किया है।
कहां किसे बनाया है पर्यवेक्षक
आयोग ने चारों चुनावी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात कर दिए हैं। सामान्य पर्यवेक्षकों में असम के लिए एस. श्रीनिवासन, पश्चिम बंगाल के लिए अजय नायक, तमिलनाडु के लिए आलोकवर्धन और केरल के लिए मंजीत सिंह को नियुक्त किया गया है।
सुरक्षा के साथ केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस के मध्य समन्वय के लिए सेवानिवृत पुलिस अधिकारियों की सेवाएं आयोग ने ली हैं। पुलिस पर्यवेक्षकों में असम के लिए अशोक कुमार, पश्चिम बंगाल के लिए दो अधिकारी विवेक दुबे और एमके दास की सेवाएं ली जाएंगी। पुडुचेरी के लिए नरेद्र कुमार, केरल के लिए दीपक मिश्रा और तमिलनाडु के लिए धर्मेंद्र कुमार को तैनात किया गया है।
चुनावी खर्च की निगरानी के लिए राजस्व सेवा के सेवानिवृत अधिकारियों में से असम में नीना निगम, पश्चिम बंगाल में बी. मुरली कुमार, केरल में पुष्पेंद्र एस. पुनिया और तमिलनाडु में मधु महाजन व बालकृष्णन की सेवाएं ली गई हैं।