पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एक बार फिर बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला किया गया है। चुनाव आयोग ने कुल 173 थानेदारों के साथ बीडीओ का तबादला किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि इन बदलावों का मकसद सिर्फ एक ही है, चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना।
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात 173 पुलिस स्टेशन के अधिकारियों (ओसी और आईसी) का तबादला कर दिया है। इनमें कोलकाता पुलिस के भी 31 अधिकारी शामिल हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराए जा सकें। चुनाव आयोग का मानना है कि लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात अधिकारी स्थानीय प्रभाव में आ सकते हैं, जिससे चुनाव प्रभावित हो सकता है।
भवानीपुर-नंदीग्राम में भी बदले गए अधिकारी
इस फेरबदल में भवानीपुर और नंदीग्राम जैसे अहम विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारी भी शामिल हैं। भवानीपुर सीट खास चर्चा में है क्योंकि यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर होने वाली है। नए आदेश के तहत सौमित्र बसु को भवानीपुर थाने का नया प्रभारी बनाया गया है, वहीं हल्दिया, कोलाघाट, एगरा और पटाशपुर जैसे क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
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पुलिस के साथ बीडीओ का तबादला
राज्य में सिर्फ पुलिस ही नहीं, चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किया है। पूर्व मेदिनीपुर जिले में 14 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) का ट्रांसफर किया गया है, जिसमें नंदीग्राम के अधिकारी भी शामिल हैं। इससे पहले भी आयोग ने 83 बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को 18 जिलों में बदला था। कुल मिलाकर यह फेरबदल कूचबिहार से लेकर दक्षिण 24 परगना तक कई जिलों में किया गया है।
तबादले को लेकर केंद्र पर हमलावर टीएमसी
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच तनाव भी देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी आरोप लगाया है कि इस तरह के ट्रांसफर राजनीतिक मकसद से किए जाते हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।