भारतीय निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य बताया था।
यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई, जिसमें मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान ड्यूटी पर तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और बंधक बना लिया था। कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने का निर्देश दिया था।
चुनाव आयोग ने 2 अप्रैल को एनआईए को भेजे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बुधवार को हुई इस घटना की जांच करने को कहा। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एनआईए की टीम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंचेगी।
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आईएसएफ उम्मीदवार समेत 17 गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में पुलिस ने बृहस्पतिवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय में अधिकारियों को साढ़े सात घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था। इनमें तीन महिला अधिकारी भी थीं।
अदालत ने सभी आरोपियों को 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि उनके पास इस घटना के पुख्ता सबूत हैं। दूसरी ओर अदालत परिसर में पत्रकारों से बातचीत में मौलाना शाहजहां अली ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, मुझे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। घटना के वक्त मैं एक धार्मिक सभा में था। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।