Special Intensive Revision In Tripura: चुनाव आयोग ने त्रिपुरा समेत सभी राज्यों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का आश्वासन दिया। टीएमपी, त्रिपुरा में भाजपा नीत गठबंधन सरकार का सहयोगी दल है, राज्य में घुसपैठ की आशंकाओं को लेकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की मांग करता रहा है।
त्रिपुरा में भाजपा की सहयोगी और माणिक साहा सरकार में साझेदार टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने बुधवार को दावा किया कि चुनाव आयोग (ईसी) ने त्रिपुरा समेत सभी राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने का आश्वासन दिया है। यह आश्वासन नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से टीएमपी प्रतिनिधिमंडल की बैठक के दौरान मिला।
टीएमपी प्रमुख प्रद्युत देबबर्मा का बयान
प्रद्युत देबबर्मा ने कहा, 'हमने आज नई दिल्ली में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की और त्रिपुरा में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने की मांग रखी। हम राज्य में अवैध प्रवासियों को नहीं आने दे सकते। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी राज्यों में एसआईआर कराया जाएगा, जिसमें त्रिपुरा भी शामिल है।'
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घुसपैठ पर टीएमपी प्रमुख ने जताई चिंता
उन्होंने दावा किया कि अगर घुसपैठ ऐसे ही जारी रही, तो एक दिन आदिवासी समुदाय (टिपरासा) को अपने अस्तित्व के लिए भीख मांगनी पड़ सकती है। टीएमपी ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि अवैध घुसपैठियों की पहचान, नाम हटाने और उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने के लिए कदम उठाए जाएं।
घुसपैठियों को नहीं दे सकते एक इंच जमीन- TMP
टीएमपी प्रमुख ने स्पष्ट कहा, 'हम राज्य में घुसपैठियों के साथ एक इंच भी जमीन साझा नहीं कर सकते।' उन्होंने यह भी कहा कि टीएमपी को चुनाव आयोग से मिलने या दिल्ली आने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा, 'टिपरा मोथा एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है। कांग्रेस और भाजपा भी अपने विचार रख सकते हैं, लेकिन हम अपने लोगों के अधिकारों के लिए दिल्ली आ सकते हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो टीएमपी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है। 'हम 50 के दशक, 60 के दशक, 70 के दशक और 90 के दशक जैसी गलतियां नहीं दोहराएंगे।'
टिपरासा समझौते पर भी बोले प्रद्युत देबबर्मा
जब उनसे टिपरासा समझौते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'अगर समझौते को लागू किया जाता है तो अच्छा है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम सरकार में अपने समर्थन पर फिर से विचार करेंगे।' गौरतलब है कि फरवरी 2024 में टीएमपी ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ एक समझौता किया था, जिसमें त्रिपुरा के आदिवासियों की समस्याओं के समाधान का वादा किया गया था। इसके बाद ही टीएमपी ने भाजपा नीत गठबंधन सरकार का हिस्सा बनना स्वीकार किया था।